नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026: हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने शिव भक्त व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र अर्पित कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सावन का महीना भगवान शिव को इतना प्रिय क्यों माना जाता है? इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

समुद्र मंथन और नीलकंठ बनने की कथा

सावन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा समुद्र मंथन की है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया, तब सबसे पहले हलाहल विष निकला। इस विष की तीव्रता से पूरे ब्रह्मांड पर संकट मंडराने लगा।

सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और तभी से वे नीलकंठ कहलाए। मान्यता है कि विष की जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसी कारण सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है।

माता पार्वती की कठोर तपस्या

एक अन्य मान्यता के अनुसार, माता सती के पुनर्जन्म के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए सावन महीने में कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

इसी कारण सावन का महीना विवाह योग्य युवतियों और सुहागिन महिलाओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इस दौरान कई महिलाएं अच्छे जीवनसाथी और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत और पूजा करती हैं।

सावन में पृथ्वी लोक पर भगवान शिव का निवास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि में सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। यह भी माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव पृथ्वी लोक पर अपने भक्तों के बीच निवास करते हैं और उनकी प्रार्थनाएं शीघ्र स्वीकार करते हैं।

सावन में क्यों किया जाता है जलाभिषेक?

सावन के दौरान शिवलिंग पर गंगाजल, जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा का संबंध भगवान शिव द्वारा हलाहल विष धारण करने की कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

सावन का धार्मिक महत्व

सावन का महीना केवल पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक माना जाता है। इस महीने में शिव उपासना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और सोमवार व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।