नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पेश किया। विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं कोई नई समस्या नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी कई बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए थे।
कांग्रेस शासन के दौरान हुए पेपर लीक मामलों का किया जिक्र
लोकसभा में चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड, 2011 में AIEEE, 2012 में AIIMS प्रवेश परीक्षा और 2013 में महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा समेत कई मामलों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा, तमिलनाडु लोक सेवा आयोग और पश्चिम बंगाल जॉइंट एंट्रेंस परीक्षा का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि 1992 और 2010 में गठित समितियों ने केंद्रीय परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के सुझाव दिए थे, लेकिन उस समय उन पर अमल नहीं किया गया।
भर्ती प्रक्रिया को बताया अधिक पारदर्शी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार के अधीन UPSC, SSC, RRB और IBPS जैसी प्रमुख भर्ती एजेंसियां कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन किया गया।
2026 संशोधन बिल में क्या है नया?
सरकार के अनुसार, Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करना है। संशोधन के तहत दोषियों, पेपर लीक माफिया और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों के लिए सजा और आर्थिक दंड को पहले से अधिक कड़ा किया गया है।
प्रमुख प्रावधान
- व्यक्तिगत दोषियों के लिए: 5 से 10 वर्ष तक की जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना।
- सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के लिए: ₹5 करोड़ तक जुर्माना और 8 वर्ष तक ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान।
- पेपर लीक माफिया के लिए: 7 से 10 वर्ष तक की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माना।
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट: मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतें गठित की जाएंगी।
- समयबद्ध जांच: केंद्रीय एजेंसी या विशेष जांच दल (STF) को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
विपक्ष को अधिक समय देने को तैयार सरकार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विधेयक पर चर्चा के लिए पहले छह घंटे का समय तय किया गया था, जिसे बढ़ाकर आठ घंटे कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष और समय चाहता है तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है, ताकि सभी पक्ष अपनी राय रख सकें।
संसद में जारी है बहस
पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा जारी है। सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा, जबकि विपक्ष विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपने सुझाव और आपत्तियां रख रहा है।




