सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। करीब 150 पन्नों की इस रिपोर्ट को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपा गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए SIT ने विस्तृत जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा है।

FIR दर्ज करने की सिफारिश

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर SIT ने संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों की गहन जांच के लिए आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना आवश्यक है, ताकि मामले के सभी पहलुओं की कानूनी पड़ताल हो सके।

ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव

जांच रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश की गई है। इसके अलावा मंदिर प्रशासन के संचालन के लिए किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है।

पांच वर्षों के चढ़ावे का ऑडिट कराने की मांग

SIT ने रिपोर्ट में मंदिर को प्राप्त दान, नकदी, सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा की आवश्यकता जताई है। इसी के तहत पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे और उससे जुड़े लेन-देन का स्वतंत्र एवं विस्तृत ऑडिट कराने की सिफारिश की गई है, ताकि किसी भी संभावित अनियमितता की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

150 से अधिक लोगों से हुई पूछताछ

जांच एजेंसी अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें मंदिर प्रशासन से जुड़े लोग, कर्मचारी, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मी और अन्य संदिग्ध व्यक्ति शामिल बताए जा रहे हैं। SIT ने इन बयानों और दस्तावेजों को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट का हिस्सा बनाया है।

कई वर्षों से चल रही थी कथित अनियमितता?

जांच में जुटी टीम को ऐसे संकेत मिले हैं कि चढ़ावे के प्रबंधन में कथित गड़बड़ियां हाल के समय तक सीमित नहीं हो सकतीं। रिपोर्ट में इस संभावना का उल्लेख किया गया है कि वित्तीय हेरफेर का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय रहा हो। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

2 करोड़ रुपये की बरामदगी का दावा

जांच के दौरान गिरफ्तार या नामजद आरोपियों की निशानदेही पर अब तक करीब 2 करोड़ रुपये की बरामदगी किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू के नामों का उल्लेख होने की चर्चा है। जांच एजेंसियां बरामद धनराशि और उससे जुड़े स्रोतों की भी पड़ताल कर रही हैं।

सोना बरामद होने का भी दावा

सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान रामशंकर उर्फ टिन्नू के आवास से बड़ी मात्रा में सोना बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि टिन्नू को ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली लोगों का करीबी माना जाता है। हालांकि बरामद सामग्री और उसके स्रोत को लेकर आधिकारिक जांच अभी जारी है।

200 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता की आशंका

प्रारंभिक आकलन में यह आशंका जताई गई है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं का दायरा 200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। हालांकि SIT ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक आंकड़ा सामने आने की बात कही जा रही है।

जांच रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें

राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में इस मामले की जांच पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। अब सरकार और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हैं। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं में किस स्तर तक जिम्मेदारी तय की जाती है और क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।