नई दिल्ली | 1 अगस्त 2026
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने कहा है कि देश में असहमति रखने वाले लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आलोचकों को चुप कराने के लिए विभिन्न कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अलग-अलग विचारों का सम्मान बेहद आवश्यक है। गोवा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा दिवंगत न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना की स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए एपी शाह ने कहा कि यदि कोई युवा किसी जनप्रतिनिधि से जवाबदेही मांगता है या इस्तीफे की मांग करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है और कई मामलों में एफआईआर भी दर्ज कर दी जाती है।
'लोकतंत्र में आलोचना का जवाब संवाद होना चाहिए'
पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना का सबसे उचित जवाब संवाद और तर्क के माध्यम से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विमर्श और विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति लोकतंत्र की आधारशिला है और न्यायपालिका भी इसी वातावरण में बेहतर तरीके से अपना दायित्व निभा सकती है।
मीडिया और कलाकारों का भी किया जिक्र
पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने कहा कि यदि कोई मीडिया संस्थान सरकार की आलोचना करता है तो उसके खिलाफ जांच या कर संबंधी कार्रवाई शुरू हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार स्टैंड-अप कॉमेडियन या कार्यक्रम आयोजकों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाती है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ता है।
न्यायपालिका की भूमिका पर भी रखी राय
पूर्व मुख्य एपी शाह ने कहा कि न्यायपालिका को कानून के शासन, प्राकृतिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उनके अनुसार अदालतों को स्वतंत्र और निष्पक्ष होकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। इसमें किसी तरह का अड़चन अच्छा नहीं होता है।
NEET छात्र आंदोलन का किया उल्लेख
अपने संबोधन में पूर्व मुख्य एपी शाह ने NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतांत्रिक ऊर्जा और जवाबदेही की मांग का प्रतीक हैं तथा यह दर्शाते हैं कि लोकतांत्रिक भावना आज भी जीवंत है। इसे हर हाल में स्वतंत्र होना चाहिए।




