मॉस्को, 6 अगस्त : भारत और रूस ने अपने रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य दोहराया है। साथ ही रूस में भारतीय पेशेवरों और कुशल कामगारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी सहमति जताई गई है। यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब रूस के साथ व्यापार और तेल खरीद को लेकर भारत पर अमेरिका की ओर से दबाव बढ़ रहा है। इसके बावजूद दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

80 साल पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम

रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने बताया कि 2027 में भारत और रूस के बीच राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे होंगे। इस अवसर पर दोनों देश आर्थिक, व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें इस ऐतिहासिक अवसर को विशेष रूप से मनाने के लिए संयुक्त कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रही हैं।

2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

भारत और रूस के शीर्ष नेतृत्व ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए ऊर्जा, रक्षा, फार्मा, कृषि, प्रौद्योगिकी और नए औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है। राजदूत ने कहा कि मौजूदा व्यापार को मजबूत करने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में निवेश और साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।

रूस में भारतीयों के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

राजदूत विनय कुमार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में रूस में भारतीय कामगारों और पेशेवरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां पहले यह संख्या लगभग 10 से 15 हजार थी, वहीं अब यह बढ़कर एक लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में इस संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। रूस के विभिन्न उद्योगों में कुशल भारतीय श्रमिकों की मांग लगातार बढ़ रही है।

ऊर्जा सहयोग रहेगा प्राथमिकता

भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना सहित कई संयुक्त परियोजनाओं पर काम जारी है। दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश को लेकर भी सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर भी नजर

राजदूत ने अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस की सक्रिय भागीदारी की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के मंच पर बहुपक्षीय सहयोग के साथ-साथ भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं।

युद्ध क्षेत्र में रोजगार को लेकर सावधानी जरूरी

हालांकि रूस में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नौकरी के लिए जाने वाले भारतीयों को अधिकृत और सत्यापित माध्यमों का ही उपयोग करना चाहिए। यूक्रेन संघर्ष के दौरान कुछ भारतीय नागरिकों के युद्ध क्षेत्र में फंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में विदेश मंत्रालय की सलाह और आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करना बेहद जरूरी है।