नई दिल्ली | 18 जुलाई 2026

देश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मेडिकल कॉलेज खोलने से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। अब कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत कोई भी कंपनी मेडिकल कॉलेज स्थापित कर सकेगी। इससे पहले केवल सेक्शन-8 (नॉन-प्रॉफिट) कंपनियों, ट्रस्ट और सोसायटी को ही मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति थी।

क्या बदला है नए नियम में?

नए नियमों के अनुसार अब लाभ कमाने वाली कंपनियां भी निर्धारित मानकों और नियामकीय शर्तों का पालन करते हुए मेडिकल कॉलेज स्थापित कर सकेंगी। सरकार का मानना है कि पुराने नियमों के कारण कई बड़े निवेशक मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में आने से बच रहे थे। नई व्यवस्था से निजी निवेश बढ़ेगा और मेडिकल सीटों की संख्या में भी इजाफा होने की संभावना है।

पहले क्या था नियम?

वर्ष 2019 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) की जगह NMC बनने के बाद नियमों को सख्त कर दिया गया था। केवल सेक्शन-8 कंपनियों को ही मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति दी गई थी। इससे पहले 2017 में MCI ने कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कंपनियों को भी मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति देने का प्रावधान किया था।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

सरकार का तर्क है कि नॉन-प्रॉफिट की शर्त के कारण बड़े कॉरपोरेट समूह मेडिकल शिक्षा में निवेश नहीं कर पा रहे थे। नई नीति से पारदर्शी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, सरकार को कर (टैक्स) का लाभ मिलेगा और देश में मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार तेजी से हो सकेगा।

फीस को लेकर बढ़ सकती है बहस

विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन फीस को लेकर नई बहस भी शुरू हो सकती है। पहले से ही कई निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों के मेडिकल कॉलेजों में फीस काफी अधिक है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए संस्थानों में फीस नियंत्रण और छात्रों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।

मेडिकल शिक्षा पर क्या होगा असर?

माना जा रहा है कि इस फैसले से देश में मेडिकल सीटों की उपलब्धता बढ़ेगी और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को नई गति मिलेगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और फीस नियंत्रण पर सख्त निगरानी भी उतनी ही जरूरी होगी, ताकि मेडिकल शिक्षा आम छात्रों की पहुंच से बाहर न हो।