बेंगलुरु, 8 अगस्त 2026: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संगठन के खिलाफ जो भी कदम उठाएगी, वह पूरी तरह कानूनी दायरे में होगा। खरगे के मुताबिक, आगे की कार्रवाई से पहले RSS और उसके करीब 100 साल के इतिहास का अध्ययन किया जा रहा है। प्रियांक खरगे ने शनिवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने संकेत दिया कि RSS से जुड़े मुद्दों पर सरकार जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती और पहले संगठन की गतिविधियों तथा उसके इतिहास को समझना जरूरी है।

RSS को लेकर क्या बोले प्रियांक खरगे ?

RSS प्रमुख मोहन भागवत को भेजे गए पत्र के जवाब के सवाल पर प्रियांक खरगे ने कहा कि उन्हें जवाब मिलने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे से उचित तरीके से निपटेगी और जो भी कार्रवाई होगी, वह कानून के मुताबिक होगी। खरगे ने कहा कि सरकार RSS को कानूनी दायरे में लाने के लिए जरूरी कदम उठाएगी। हालांकि इस दौरान, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार की अगली कार्रवाई क्या होगी।

'100 साल के इतिहास को समझने की जरूरत'

गृह मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को उठाए करीब डेढ़ महीने हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को आगे बढ़ने से पहले RSS के करीब 100 साल के इतिहास का अध्ययन करना होगा। खरगे ने RSS की ओर से देशभक्ति या देशद्रोह जैसे मुद्दों पर प्रमाणपत्र दिए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि किसी व्यक्ति के देशभक्त या देशद्रोही होने का फैसला करने का अधिकार किसी संगठन के पास कैसे हो सकता है।

मोहन भागवत पर भी साधा निशाना

प्रियांक खरगे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया कार्यक्रमों को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने RSS की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन दूसरों को देशभक्ति का प्रमाणपत्र देने की स्थिति में नहीं होना चाहिए। हालांकि, खरगे ने यह भी कहा कि सरकार आगे की रणनीति सार्वजनिक नहीं करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि कार्रवाई से पहले कानूनी पहलुओं की पूरी तरह समीक्षा की जाएगी।

पत्र का जवाब नहीं मिला तो क्या होगा ?

जब प्रियांक खरगे से पूछा गया कि अगर RSS की ओर से उनके पत्र का जवाब नहीं आता है तो सरकार क्या करेगी, उन्होंने कहा कि सरकार अपनी योजना के मुताबिक आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अभी कार्रवाई की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक, आगे उठाए जाने वाले कदमों में कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।

अवैध प्रवासियों पर भी सरकार सख्त

RSS के अलावा प्रियांक खरगे ने राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान को लेकर भी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान के लिए लगातार सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश से आए लोगों समेत दूसरे देशों के नागरिकों की भी जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में सरकार किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।

तीन महीने में करीब 1000 लोगों की पहचान

प्रियांक खरगे के मुताबिक, पिछले तीन महीनों के दौरान करीब 1,000 लोगों को पकड़ा गया है। इनमें अफ्रीकी देशों के नागरिक, बांग्लादेशी और अन्य लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ लोगों के उत्तर भारत से आने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस अभियान के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारियों (FRO) के संपर्क में है। बेंगलुरु के विभिन्न इलाकों में भी पुलिस द्वारा सत्यापन व जांच अभियान चलाया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला ?

कर्नाटक सरकार का RSS को लेकर रुख उस समय सामने आया है, जब राज्य में संगठन की गतिविधियों और उसके कानूनी दर्जे से जुड़े सवालों पर बहस चल रही है। प्रियांक खरगे ने संकेत दिया है कि सरकार किसी भी कार्रवाई से पहले RSS के इतिहास, कानूनी स्थिति और संबंधित नियमों का अध्ययन करेगी। RSS पर कार्रवाई को लेकर कर्नाटक सरकार ने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन गृह मंत्री प्रियांक खरगे के बयान से साफ है कि सरकार कानूनी समीक्षा के बाद आगे कदम उठाने की तैयारी में है। वहीं अवैध प्रवासियों की पहचान को लेकर भी राज्य सरकार ने सख्त अभियान जारी रखने का संकेत दिया है।