हल्द्वानी | 18 जुलाई 2026
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित गौलापार में प्रस्तावित जू सफारी परियोजना को करीब एक दशक बाद नई गति मिलती दिखाई दे रही है। लंबे समय से अटकी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए निर्माण एजेंसी ब्रिडकुल (BRIDCUL) ने 412 हेक्टेयर भूमि का सर्वे पूरा कर लगभग 270 करोड़ रुपये की प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) वन विभाग को सौंप दी है। अब इस रिपोर्ट के परीक्षण के बाद इसे शासन के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
अगस्त तक डीपीआर तैयार करने का लक्ष्य
ब्रिडकुल को मई 2026 में इस परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। एजेंसी ने वन विभाग के साथ संयुक्त समिति बनाकर आधुनिक सैटेलाइट आधारित तकनीक से भूमि का सर्वेक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, शासन से पीपीआर स्वीकृत होने के बाद परियोजना लागत का दो प्रतिशत यानी करीब 5.4 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे, जिससे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होगी। एजेंसी का लक्ष्य अगस्त 2026 के अंत तक डीपीआर तैयार करना है।
10 वर्षों से अटकी रही परियोजना
गौलापार जू सफारी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2016 में तत्कालीन राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के रूप में की थी। बाद में इसका नाम बदलकर जू सफारी रखा गया। परियोजना के तहत 14.52 करोड़ रुपये की लागत से 13 किलोमीटर लंबी चारदीवारी भी बनाई गई, लेकिन वर्ष 2021 में केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की आपत्तियों के कारण काम रुक गया। वर्ष 2022 में मंत्रालय ने वन्यजीव कॉरिडोर प्रभावित नहीं होने की शर्त पर इसे आगे बढ़ाने की अनुमति दी।
अब बढ़ी उम्मीदें
वर्ष 2024 में डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी दूसरी एजेंसी को दी गई थी, लेकिन धनराशि उपलब्ध नहीं होने से काम आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद मई 2026 में ब्रिडकुल को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ हिमांशु बागरी ने बताया कि प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। मंजूरी मिलने के बाद जू सफारी परियोजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज होगी।




