वॉशिंगटन, 3 नवंबर 2026 : अमेरिका में आज मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने के बाद यह चुनाव उनकी नीतियों और सरकार के कामकाज पर जनता की राय जानने का अहम मौका माना जा रहा है। चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में अपना बहुमत बचाने की चुनौती है। भारतीय समय के अनुसार मतदान शाम 4:30 बजे शुरू होगी। इस चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होना है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव होंगे। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति की राजनीतिक स्थिति और आने वाले दो वर्षों में उनकी नीतियों को लागू करने की क्षमता पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत है। अगर पार्टी किसी एक सदन में बहुमत गंवा देती है तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अपने एजेंडे से जुड़े कानूनों को पास कराना मुश्किल हो सकता है।

अमेरिकी कांग्रेस में बहुमत का गणित: कितनी सीटें जरूरी?

अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दो सदन हैं- सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स। दोनों में बहुमत हासिल करने के लिए अलग-अलग सीटों का गणित है।

सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटें जरूरी

अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। आंकड़ों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 सीटें हैं। दो निर्दलीय सांसद डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करते हैं। इस तरह सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक गठबंधन के बीच सीटों का अनुपात 53-47 है। सीनेट में सामान्य बहुमत के लिए 51 वोट जरूरी हैं। हालांकि दोनों दलों के बीच 50-50 सीटों की बराबरी होने पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस निर्णायक वोट डाल सकते हैं। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें 22 सीटें रिपब्लिकन और 13 सीटें डेमोक्रेटिक पार्टी के पास हैं। डेमोक्रेट्स को सीनेट में बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों का फायदा उठाना होगा।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 218 सीटों का लक्ष्य

अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए किसी पार्टी को कम से कम 218 सीटें जीतनी होती हैं। इस बार सभी 435 सीटों पर चुनाव हो रहा है। ऐसे में हर सीट पर मुकाबला महत्वपूर्ण है। रिपब्लिकन पार्टी के सामने अपना मौजूदा बहुमत बचाने की चुनौती है, जबकि डेमोक्रेट्स की कोशिश निचले सदन में बहुमत हासिल करने की है।

यूएस Midterm चुनाव 2026 : चुनाव में ये 4 मुद्दे अहम

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में अर्थव्यवस्था, इमिग्रेशन, टैरिफ और गर्भपात के अधिकार जैसे मुद्दे चर्चा में हैं।

1. ईरान युद्ध और बढ़ती महंगाई

ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा चुनावी चर्चा में है। खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, डीजल की कीमतों में 70% और पेट्रोल की कीमतों में 50% तक वृद्धि हुई है। बढ़ती कीमतों के बीच राष्ट्रपति ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट का दावा भी किया गया है। रूस से डीजल खरीदने के फैसले को लेकर भी उनकी आलोचना हो रही है। महंगाई और ईंधन की कीमतें अमेरिकी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।

2. इमिग्रेशन और अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई

ट्रम्प प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति भी चुनाव में बड़ा मुद्दा है। खबर के मुताबिक, ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती 18 महीनों में करीब 9.8 लाख लोगों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया। वहीं, मेक्सिको सीमा पर अवैध घुसपैठ में 95% की कमी का दावा किया गया है। रिपब्लिकन समर्थक इसे सीमा सुरक्षा से जोड़ते हैं, जबकि डेमोक्रेट्स का कहना है कि सख्त कार्रवाई से परिवार बिछड़ रहे हैं और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को भी देश से निकाला जा रहा है। खेती और निर्माण जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की उपलब्धता पर भी इस नीति के असर को लेकर बहस हो रही है।

3. ट्रंप के टैरिफ और अमेरिकी नौकरियों का मुद्दा

राष्ट्रपति ट्रम्प ने आयात पर टैरिफ लगाकर अमेरिकी कंपनियों और घरेलू रोजगार को बढ़ावा देने का वादा किया था। हालांकि टैरिफ के कारण गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ों और निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ने का मुद्दा भी सामने आया है। इसके अलावा दूसरे देशों की ओर से लगाए गए जवाबी टैरिफ का असर अमेरिकी किसानों के सोयाबीन और मक्का कारोबार पर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।

4. गर्भपात का अधिकार और महंगा स्वास्थ्य बीमा

गर्भपात का कानूनी अधिकार और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी चुनाव के अहम मुद्दे हैं।डेमोक्रेटिक पार्टी गर्भपात के अधिकार को देशभर में कानूनी सुरक्षा देने की पक्षधर है। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी का रुख है कि इस मामले में फैसला लेने का अधिकार अलग-अलग राज्यों के पास होना चाहिए। इसके अलावा ओबामाकेयर के तहत मिलने वाले स्वास्थ्य बीमा और सरकारी सब्सिडी में संभावित कटौती का मुद्दा भी मतदाताओं के बीच चर्चा में है।

सीनेट की 5 सीटों पर खास नजर

इस चुनाव में कुछ राज्यों की सीनेट सीटों पर मुकाबला खास तौर पर चर्चा में है।

टेक्सास : रिपब्लिकन केन पैक्सटन और डेमोक्रेट जेम्स टैलारिको के बीच मुकाबला है। खबर में शामिल अक्टूबर के सर्वे में दोनों को 49% समर्थन मिला था।

ओहायो : रिपब्लिकन जॉन हस्टेड और डेमोक्रेट शेरोड ब्राउन आमने-सामने हैं। सर्वे में ब्राउन को 4 से 6 पॉइंट की बढ़त बताई गई है।

नॉर्थ कैरोलाइना : डेमोक्रेट रॉय कूपर और रिपब्लिकन माइकल वाटले के बीच मुकाबला है। एक सर्वे में कूपर को 52% और वाटले को 39% समर्थन मिला।

मिशिगन : डेमोक्रेट अब्दुल अल-सईद और रिपब्लिकन माइक रोजर्स के बीच मुकाबला है। एक सर्वे में अल-सईद को 50% और रोजर्स को 48% समर्थन मिला।

मेन : डेमोक्रेट ट्रॉय जैक्सन और रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स के बीच मुकाबला है। सर्वे में जैक्सन को 49% और कॉलिन्स को 47% समर्थन मिला।

ये सर्वेक्षण आधारित आंकड़े हैं, चुनाव परिणाम नहीं।

Samosa Caucus: 6 भारतीय मूल के उम्मीदवार भी मैदान में

अमेरिकी चुनाव में भारतीय मूल के नेताओं की मौजूदगी भी चर्चा में है। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों के समूह को 'समोसा कॉकस' कहा जाता है। इस बार अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा अमीश शाह और पिया डांडिया भी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के उम्मीदवार हैं। ये सभी छह उम्मीदवार डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं। कुछ सीटों पर भारतीय मूल के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला भी है। कैलिफोर्निया में रो खन्ना का सामना रिपब्लिकन उम्मीदवार रितेश टंडन से है। वहीं, वॉशिंगटन में प्रमिला जयपाल के सामने रिपब्लिकन उम्मीदवार नीरव शेठ हैं। राजा कृष्णमूर्ति सीनेट चुनाव की डेमोक्रेटिक प्राइमरी हार चुके हैं, जबकि श्री थानेदार हाउस की प्राइमरी में हारकर चुनावी दौड़ से बाहर हो गए।

विवेक रामास्वामी भी गवर्नर पद की दौड़ में

रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी ओहायो में गवर्नर पद के उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला डेमोक्रेट एमी एक्टन से है। अगर रामास्वामी चुनाव जीतते हैं तो वे बॉबी जिंदल व निक्की हेली के बाद भारतीय मूल के तीसरे अमेरिकी गवर्नर बनेंगे। 'समोसा कॉकस' नाम 2018 में भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने दिया था। यह नाम भारतीय मूल के सांसदों की साझा पहचान को दर्शाता है।

ट्रम्प के लिए क्यों अहम हैं मिडटर्म चुनाव ?

मिडटर्म चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अगर रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो ट्रम्प के लिए अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत आसान रहेगा। वहीं, अगर डेमोक्रेट्स हाउस या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो राष्ट्रपति के विधायी प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही कांग्रेस की समितियों और निगरानी संबंधी शक्तियों के जरिए राष्ट्रपति प्रशासन पर निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए यह चुनाव सिर्फ कांग्रेस की सीटों का मुकाबला नहीं, बल्कि ट्रम्प प्रशासन के पहले दो वर्षों के कामकाज पर मतदाताओं की प्रतिक्रिया भी है।