मुंबई, 5 नवंबर 2026 : धनतेरस से ठीक एक दिन पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। गुरुवार यानी पांच नवंबर को सेंसेक्स 2,008 अंक यानी 2.60% की बढ़त के साथ 79,310 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 576 अंक यानी 2.40% उछलकर 24,537 पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ। सेंसेक्स के लिए यह इस साल की दूसरी सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त रही। इससे पहले 8 अप्रैल को सेंसेक्स में 2,946 अंकों की तेजी आई थी।
सात महीने बाद सेंसेक्स में इतनी बड़ी तेजी
गुरुवार को शेयर बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स में 2.60% की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 2.40% चढ़कर बंद हुआ। निफ्टी ने 4 सितंबर के बाद पहली बार 24 हजार का स्तर पार किया। इस तेजी का फायदा निवेशकों को भी मिला। बाजार में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह है कि बाजार में लगातार छठे कारोबारी दिन तेजी बनी रही। 28 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच सेंसेक्स 73,246 के स्तर से बढ़कर 79 हजार के करीब पहुंच गया।
शेयर बाजार में तेजी की 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों से ग्लोबल बाजार को सहारा
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों को बाजार की तेजी की एक अहम वजह माना जा रहा है। चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में नुकसान होने की खबरों के बाद निवेशकों की नजर अमेरिकी नीतियों और वैश्विक तनाव पर टिक गई है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के खत्म होने की संभावनाओं को लेकर भी बाजार में उम्मीद बढ़ी है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, तो वैश्विक कारोबार और सप्लाई चेन को राहत मिल सकती है। इससे निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा बढ़ सकता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत की उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनी। ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड का भाव 87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश के आयात बिल में कमी आ सकती है।इससे महंगाई पर दबाव घटने, चालू खाते के घाटे में सुधार और कंपनियों की लागत कम होने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
3. कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
सितंबर तिमाही के बेहतर कारोबारी नतीजों ने भी बाजार का माहौल मजबूत किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और टीसीएस जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स पर पड़ता है। गुरुवार को सेंसेक्स की ज्यादातर कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि कंपनियों की कमाई में सुधार जारी रहने से शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
4. डॉलर में कमजोरी की उम्मीद से विदेशी निवेशकों का रुख बदला
डॉलर में संभावित कमजोरी को भी बाजार में तेजी की एक वजह माना जा रहा है। आमतौर पर डॉलर कमजोर होने पर विदेशी निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश आकर्षक हो सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की खरीदारी बढ़ने से भारतीय शेयरों की मांग बढ़ती है। इसका सकारात्मक असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिखाई देता है।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
भारतीय शेयर बाजार में जहां जोरदार तेजी रही, वहीं एशिया के दूसरे प्रमुख बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला।
बाजार ———————— स्तर ———— बदलाव
कोस्पी (दक्षिण कोरिया)—— 5,384 ———- 5.28%
निक्केई (जापान) ————— 61,078 ——— 1.79%
हैंगसेंग (हॉन्ग कॉन्ग) ———— 24,797 ——- +3.67%
दक्षिण कोरिया और जापान के शेयर बाजारों में गिरावट रही, जबकि हॉन्ग कॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ।
LTCG टैक्स में कटौती की उम्मीद से भी सुधरा बाजार का माहौल
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में संभावित बदलाव की उम्मीद ने बाजार का सेंटीमेंट बेहतर किया है। उनके मुताबिक, इन वजहों से विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार को लेकर नजरिया बदल सकता है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भी विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार में सुधार की एक वजह माना है।
आगे भी बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में तेजी की उम्मीद
डॉ. वीके विजयकुमार का मानना है कि विदेशी निवेशकों की शुरुआती खरीदारी से लार्जकैप शेयरों में तेजी आई है। आने वाले समय में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की बड़ी कंपनियों के शेयरों में और रिकवरी देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक, लार्जकैप शेयरों में अभी शॉर्ट कवरिंग की गुंजाइश बनी हुई है। ऐसे में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर बाजार की अगली तेजी की अगुवाई कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को मुनाफावसूली के जोखिम को लेकर भी आगाह किया है। बाजार में तेजी जारी रहने पर घरेलू निवेशक ऊंचे स्तरों पर शेयर बेचकर मुनाफा निकाल सकते हैं। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका रहेगी। इसलिए निवेशकों के लिए बाजार की तेजी के साथ-साथ कंपनियों के नतीजों, वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर रखना भी जरूरी होगा।






