वॉशिंगटन, 20 अक्टूबर 2026 : अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। महंगाई, ईरान के साथ जारी संघर्ष और ट्रंप की घटती लोकप्रियता ने चुनावी मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया है।हालिया सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत खतरे में पड़ सकता है। रॉयटर्स-इप्सोस के 19 अक्टूबर को जारी सर्वे के मुताबिक, ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 31% पर पहुंच गई। वहीं, अगर कांग्रेस चुनाव में वोट देने की बात हो, तो 47% पंजीकृत मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी और 35% ने रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन किया।
मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के लिए क्यों अहम हैं ?
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इस दौरान प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। इस चुनाव में राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, बल्कि कांग्रेस के दोनों सदनों में किस पार्टी का बहुमत होगा, यह तय होता है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी को प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में मामूली बहुमत हासिल है। अगर डेमोक्रेट्स पर्याप्त सीटें जीत लेते हैं तो वे एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर सकते हैं। इससे ट्रंप के लिए कानून पारित कराना और राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
1. ट्रंप की लोकप्रियता में रिकॉर्ड गिरावट
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय है। रॉयटर्स-इप्सोस के ताजा सर्वे में केवल 31% लोगों ने राष्ट्रपति के कामकाज को मंजूरी दी। अन्य सर्वेक्षणों में भी उनकी लोकप्रियता कमजोर दिखाई दी है। कम अप्रूवल रेटिंग का असर उन उम्मीदवारों पर पड़ सकता है, जो ट्रम्प के समर्थन के सहारे चुनाव जीतना चाहते हैं। खासकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला मुश्किल हो सकता है, जहां स्वतंत्र मतदाताओं और मध्यमार्गी वोटरों की भूमिका अहम है।
2. महंगाई बनी चुनावी मुद्दा
2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महंगाई कम करने और आम लोगों का खर्च घटाने का वादा किया था। लेकिन रोजमर्रा की चीजों और ईंधन की कीमतों को लेकर बनी चिंता अब उनकी पार्टी के लिए चुनौती बन रही है। रॉयटर्स-इप्सोस सर्वे में 68% लोगों ने ट्रम्प के आर्थिक प्रदर्शन पर असंतोष जताया। सर्वे में यह भी सामने आया कि मतदाताओं के बीच अर्थव्यवस्था को संभालने के मामले में डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन पार्टी की तुलना में बढ़त मिल रही है।
3. ईरान संघर्ष से बढ़ा दबाव
ईरान के साथ संघर्ष भी ट्रम्प प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है। सैन्य कार्रवाई और उससे जुड़े घटनाक्रम के बीच ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर आम अमेरिकी परिवारों के बजट पर पड़ सकता है। विदेश नीति को लेकर मतदाताओं की राय भी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, ईरान संघर्ष का अंतिम चुनावी परिणामों पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
4. रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प से बना रहे दूरी
ट्रंप की घटती लोकप्रियता के बीच उनकी पार्टी के कुछ उम्मीदवार अपनी चुनावी रणनीति बदल रहे हैं।जानकारी के मुताबिक कांग्रेस की 62 प्रतिस्पर्धी सीटों में से 41 सीटों पर रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने ट्रम्प की कुछ नीतियों से असहमति जताई या उनसे अपनी नजदीकी कम दिखाई। इन उम्मीदवारों के सामने दोहरी चुनौती है। ट्रम्प के साथ अधिक नजदीकी रखने पर उन्हें उनकी घटती लोकप्रियता का नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि उनसे दूरी बनाने पर पार्टी के कट्टर समर्थक नाराज हो सकते हैं।
बहुमत गंवाने पर ट्रम्प के सामने क्या चुनौतियां होंगी ?
अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रम्प के विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में बाधाएं आ सकती हैं। कांग्रेस में बजट, सरकारी खर्च और कानूनों से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं। प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने पर डेमोक्रेट्स को प्रशासन के कामकाज की जांच करने और निगरानी बढ़ाने की अधिक शक्ति मिल सकती है। हालांकि रिपब्लिकन पार्टी के पास चुनावी संसाधन और मजबूत समर्थक आधार जैसे फायदे हैं। सर्वेक्षण ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के सामने चुनौती का संकेत दे रहे हैं मगर चुनावी नतीजे मतदाताओं की भागीदारी और अलग-अलग राज्यों में होने वाले मुकाबलों पर निर्भर करेंगे। 3 नवंबर के मिडटर्म चुनाव तय करेंगे कि रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना बहुमत बचा पाती है या डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलती है।




