नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या अहम तथ्य छिपाने के आरोप में निर्वाचित उम्मीदवार के खिलाफ कोई शख्स आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग या संबंधित सरकारी अधिकारी की शिकायत जरूरी नहीं है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसी शिकायत के लिए चुनाव आयोग या किसी सरकारी अधिकारी की ओर से शिकायत किया जाना अनिवार्य नहीं है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यह फैसला राजकुमार मड़की की अपील पर सुनाया है। मामला कर्नाटक के बीदर से 2023 में विधायक चुने गए डॉ. शैलेंद्र बेलदाले के चुनावी हलफनामे से जुड़ा था।

क्या है पूरा मामला ?

राजकुमार मड़की ने आरोप लगाया था कि विधायक शैलेंद्र बेलदाले ने नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में अपने घर के पते को लेकर गलत जानकारी दी थी। इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई थी। कर्नाटक हाई कोर्ट ने शिकायत खारिज करते हुए कहा था कि इस तरह के मामले में शिकायत केवल चुनाव आयोग या संबंधित सरकारी अधिकारी ही कर सकते हैं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की दलील को गलत बताया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 125ए के तहत चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने से जुड़े अपराधों पर भारतीय नागरिक शिकायत कर सकता है। अदालत ने इस मामले में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195(1) के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि ऐसे अपराधों के लिए सरकारी अधिकारी की शिकायत को अनिवार्य मानना सही नहीं है। अदालत के मुताबिक, यदि कानून में शिकायत दर्ज कराने का अधिकार केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित रखना होता, तो इसके लिए स्पष्ट प्रावधान किया जा सकता था।

विधायक के खिलाफ कार्रवाई बहाल नहीं हुई

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की कानूनी व्याख्या को गलत ठहराया, लेकिन विधायक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बहाल नहीं की। इसलिए इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि चुनावी हलफनामे से जुड़ी हर शिकायत पर स्वतः मुकदमा चलेगा या उम्मीदवार को दोषी माना जाएगा।

फैसले का क्या होगा असर ?

यह फैसला चुनावी पारदर्शिता और उम्मीदवारों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने के आरोपों को कानूनी रूप से चुनौती देने का रास्ता स्पष्ट होता है। हालांकि, शिकायत की वैधता और आगे की आपराधिक कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।