नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026 : भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना राजनीतिक अनिश्चितता के कारण चुनौतियों का सामना कर रही है। त्रिपुरा के सबरूम को बांग्लादेश के रामगढ़ से जोड़ने वाला मैत्री सेतु 2021 में उद्घाटित हुआ था, लेकिन इसके जरिए प्रस्तावित व्यापक कनेक्टिविटी को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं। इसी बीच जापान की नजर बांग्लादेश के मातारबारी गहरे समुद्र वाले बंदरगाह पर है, जिसे वह क्षेत्रीय व्यापार और औद्योगिक विकास के बड़े केंद्र के रूप में देख रहा है।

मैत्री सेतु से पूर्वोत्तर भारत को क्या फायदा ?

मैत्री सेतु फेनी नदी पर बना करीब 1.9 किलोमीटर लंबा पुल है। यह भारत के त्रिपुरा स्थित सबरूम को बांग्लादेश के रामगढ़ से जोड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 9 मार्च 2021 को इसका उद्घाटन किया था। इस पुल से पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद थी। इसके साथ ही चटगांव क्षेत्र और मातारबारी बंदरगाह तक पहुंच के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, इस मार्ग से व्यापारिक आवाजाही शुरू होने और इसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने की स्थिति को लेकर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी जरूरी है।

मातारबारी बंदरगाह पर जापान की नजर

बांग्लादेश में मातारबारी डीप-सी पोर्ट परियोजना को जापान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी JICA का समर्थन मिला है। परियोजना पूरी होने पर यह बंदरगाह बड़े समुद्री जहाजों के संचालन और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जापान की योजना बंदरगाह को एक व्यापक औद्योगिक और वाणिज्यिक नेटवर्क से जोड़ने की है। इससे बांग्लादेश के साथ-साथ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

भारत-बांग्लादेश के रिश्तों का असर

शेख हसीना के कार्यकाल में भारत और बांग्लादेश के बीच संपर्क तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया था। सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई अनिश्चितता ने क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं पर सवाल खड़े किए हैं। मैत्री सेतु और मातारबारी बंदरगाह की उपयोगिता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि दोनों देश सीमा पार संपर्क, व्यापारिक प्रक्रियाओं और परिवहन व्यवस्था को लेकर किस तरह आगे बढ़ते हैं।

जापान चाहता है क्षेत्रीय औद्योगिक कॉरिडोर

जापान मातारबारी बंदरगाह को सिर्फ समुद्री परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के केंद्र के रूप में देख रहा है। इसके जरिए बांग्लादेश को विनिर्माण, व्यापार और लॉजिस्टिक्स का बड़ा केंद्र बनाने की संभावना जताई गई है। इस योजना में पूर्वोत्तर भारत के अलावा नेपाल, भूटान और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संपर्क की संभावनाएं भी शामिल हैं। जापान दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय आर्थिक गलियारों के विकास का अनुभव इस क्षेत्र में भी इस्तेमाल करना चाहता है।

तारिक रहमान की संभावित जापान यात्रा पर नजर

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की जापान यात्रा को लेकर तैयारियां चल रही हैं। हालांकि यात्रा की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस संभावित दौरे में मातारबारी बंदरगाह और उससे जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद जताई गई है। मैत्री सेतु और मातारबारी बंदरगाह पूर्वोत्तर भारत और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के लिए व्यापार तथा परिवहन के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। लेकिन इन परियोजनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत-बांग्लादेश के बीच व्यावहारिक सहयोग और संपर्क व्यवस्था को आगे बढ़ाना अहम होगा।