ढाका, 20 अक्टूबर 2026 : बांग्लादेश की सेना में कथित असंतोष को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की सैन्य अकादमी में बांग्लादेशी कैडेटों की ट्रेनिंग और पूर्व सैन्य अधिकारियों को पिछली तारीख से पदोन्नति देने के फैसले को लेकर सेना के कुछ अधिकारियों में नाराजगी है। रिपोर्ट में सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां और सरकार के बीच मतभेदों का भी दावा किया गया है। हालांकि, सेना में बगावत या तख्तापलट जैसी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पाकिस्तान की सैन्य अकादमी में ट्रेनिंग पर विवाद

नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 17 अक्टूबर को पाकिस्तान के काकुल स्थित पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी (PMA) में 154वें लॉन्ग कोर्स की पासिंग-आउट परेड आयोजित हुई। इसमें बांग्लादेशी कैडेट रियाद महमूद खान को चीफ ऑफ ओवरसीज गोल्ड मेडल दिए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट का दावा है कि इस घटनाक्रम से बांग्लादेशी सेना के कुछ अधिकारियों में असंतोष है। उनकी कथित आपत्ति यह है कि 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई के ऐतिहासिक संदर्भ को देखते हुए पाकिस्तानी सैन्य संस्थान में प्रशिक्षण का फैसला संवेदनशील है। हालांकि, इस मुद्दे पर बांग्लादेशी सेना की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध कराए गए विवरण में शामिल नहीं है।

150 पूर्व सैन्य अधिकारियों की पदोन्नति पर सवाल

रिपोर्ट में विवाद की दूसरी वजह लगभग 150 पूर्व सैन्य अधिकारियों को पिछली तारीख से पदोन्नति और वित्तीय लाभ देने का फैसला बताया गया है। यह कदम कथित तौर पर उन अधिकारियों के लिए उठाया गया, जिन्हें पहले बर्खास्त कर दिया गया था या समय से पहले सेवानिवृत्त किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों ने इस प्रस्ताव पर आपत्तियां जताई थीं। इसके बावजूद सशस्त्र बल प्रभाग की ओर से फैसला लागू किए जाने का दावा किया गया है। कुछ अधिकारियों के राजनीतिक झुकाव और जमात-ए-इस्लामी से कथित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

सेना प्रमुख और सुरक्षा बल के अधिकारी के बीच कथित बहस

नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट में ढाका छावनी में एक कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां और विशेष सुरक्षा बल (SSF) के महानिदेशक मेजर जनरल महबूबुस समद चौधरी के बीच तीखी बहस होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कमान व्यवस्था में बदलाव और पूर्व सैन्य अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर असहमति इस कथित विवाद की वजह थी। हालांकि, इस घटना की आधिकारिक पुष्टि या संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष उपलब्ध कराए गए विवरण में नहीं है।

सेना प्रमुख के भारत दौरे को लेकर भी चर्चा

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सेना प्रमुख का भारत दौरा कई बार टला। इसके लिए सरकारी मंजूरी में कथित देरी और राजनीतिक अनिच्छा को वजह बताया गया है। भारत और बांग्लादेश के सैन्य संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, दौरे रद्द होने के कारणों और इसमें किसी राजनीतिक दबाव की भूमिका को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

क्या बांग्लादेशी सेना में बगावत की स्थिति है ?

उपलब्ध रिपोर्ट में सैन्य प्रशिक्षण, पदोन्नति और कमान व्यवस्था को लेकर कथित असंतोष का जिक्र है। लेकिन इन दावों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि बांग्लादेशी सेना में बगावत शुरू हो गई है।वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए बांग्लादेशी सेना, सरकार और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया व स्वतंत्र समाचार स्रोतों से पुष्टि जरूरी है। पाकिस्तान के साथ सैन्य संपर्क और पूर्व अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर सामने आए दावे बांग्लादेश की सैन्य व्यवस्था में मतभेदों की ओर संकेत करते हैं।