पेरिस/वॉशिंगटन, 20 अक्टूबर : फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि फ्रांस की राजधानी पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा। इसके साथ ही फ्रांस में हिंसा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन नीति पर जमकर निशाना साधा है। ट्रम्प ने दावा किया है कि पेरिस जल्द ही मुस्लिम शहर बन जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस में दूसरे देशों से लोगों को आने देने की नीति ने हालात काफी बिगाड़े हैं। हालांकि फ्रांस में हालिया प्रदर्शन महंगाई, बढ़ती जीवनयापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर शुरू हुए थे। हिंसा के लिए केवल इमिग्रेशन को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगा।

ट्रम्प ने मैक्रों को लेकर क्या कहा ?

19 अक्टूबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने कई साल पहले ही मैक्रों को इमिग्रेशन को लेकर चेतावनी दी थी। उनके मुताबिक, फ्रांस ने दूसरे देशों से आने वाले लोगों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। ट्रम्प ने दावा किया कि पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा। उन्होंने फ्रांस से अपनी सीमाओं पर सख्ती करने की अपील भी की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब फ्रांस के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और लूटपाट की घटनाएं हुई हैं।

फ्रांस में कितनी है मुस्लिम आबादी ?

प्यू रिसर्च सेंटर के 2020 के अनुमान के मुताबिक, फ्रांस की कुल आबादी में लगभग 9% मुस्लिम हैं। करीब 46% आबादी ईसाई है, जबकि लगभग 43% लोग किसी धर्म से संबद्ध नहीं हैं। फ्रांस में जनगणना के दौरान नियमित रूप से नागरिकों का धर्म दर्ज नहीं किया जाता है। इसलिए धार्मिक आबादी के आंकड़े सर्वेक्षणों और अनुमानों पर आधारित होते हैं। सबसे खास बात यह है कि फ्रांस की धार्मिक आबादी के आंकड़ों से राजधानी पेरिस के भविष्य की धार्मिक संरचना के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दावे को शत प्रतिशत सहीं नहीं माना जा सकता है।

महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप

17 अक्टूबर को फ्रांस के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख चिंताओं में महंगाई, ईंधन की कीमतें, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति शामिल थीं। कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। दुकानों में लूटपाट हुई, वाहनों और सार्वजनिक इमारतों को आग के हवाले किया गया। लिमोज शहर के ऐतिहासिक टाउन हॉल को भी आग से भारी नुकसान पहुंचा।फ्रांसीसी अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा के बाद करीब 2,400 लोगों को हिरासत में लिया गया और लगभग 1,000 पुलिसकर्मी तथा जेंडरमेरी के जवान घायल हुए।

मैक्रों ने हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की निंदा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों की मांगों और हिंसा में शामिल लोगों की गतिविधियों को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। सरकार ने प्रभावित शहरों में सुरक्षा बढ़ाने और जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू लगाने जैसे कदम उठाए। वहीं, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

क्या फ्रांस की हिंसा के पीछे सिर्फ इमिग्रेशन है ?

फ्रांस में जारी घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। राष्ट्रपति ट्रंप और कुछ दक्षिणपंथी नेता इमिग्रेशन नीति को हिंसा से जोड़ रहे हैं। दूसरी ओर प्रदर्शन की शुरुआत आर्थिक परेशानियों, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष से हुई थी। इसलिए हिंसा के कारणों को केवल किसी धर्म या प्रवासी समुदाय से जोड़ना तथ्यों को अधूरा पेश करना होगा। फ्रांस में आगे हालात कैसे बदलते हैं, यह सरकार की नीतियों, सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर निर्भर करेगा।