इस्लामाबाद, 24 अगस्त 2026 : पाकिस्तान में नए रक्षा कानून के बाद सेना के कमांड स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। संसद में ‘डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट 2026’ पारित होने के बाद फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सैन्य भूमिका और अधिकारों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इसे पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं। नए कानून के तहत पाकिस्तान में एक ‘डिफेंस हेडक्वार्टर’ बनाए जाने का प्रावधान है, जिसे सशस्त्र बलों के मुख्यालय के तौर पर काम करना है। इसके साथ ही सैन्य कमांड को एकीकृत करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
असीम मुनीर के पास बढ़ी सैन्य कमान
रिपोर्ट के मुताबिक, नए कमांड स्ट्रक्चर में नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड भी अहम भूमिका निभाएगी। इसके प्रमुख के तौर पर जनरल आमिर रजा की नियुक्ति की गई है। सैन्य ढांचे में हुई इन नियुक्तियों को असीम मुनीर के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। असीम मुनीर पहले पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस और बाद में ISI के प्रमुख रह चुके हैं। इसके बाद उन्हें फील्ड मार्शल का पद दिया गया। अब नए सैन्य ढांचे में उनकी भूमिका और प्रभाव को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में चर्चा तेज है।
नए कानून से क्या बदलेगा ?
नए कानून का प्रमुख उद्देश्य पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के कमांड स्ट्रक्चर को अधिक एकीकृत करना बताया जा रहा है। इसके तहत एक साझा डिफेंस हेडक्वार्टर तैयार करने की व्यवस्था है। इस बदलाव को पाकिस्तान में सेना की निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होने के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, कानून के वास्तविक प्रभाव और विभिन्न सैन्य पदों के बीच अधिकारों के बंटवारे को लेकर आगे की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ी सेना की भूमिका पर बहस
पाकिस्तान में सेना का राजनीति पर प्रभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। नए कानून के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है कि देश में निर्वाचित सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच शक्ति संतुलन किस दिशा में जा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के सामने भी सैन्य नेतृत्व के साथ संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है। हालांकि, असीम मुनीर को सीधे तौर पर पाकिस्तान का ‘तानाशाह’ कहना एक राजनीतिक विश्लेषण है, न कि कानून में इस्तेमाल किया गया कोई संवैधानिक पद या आधिकारिक दर्जा।
मिसाइल और रणनीतिक कमांड को लेकर भी चर्चा
नए कमांड स्ट्रक्चर के बीच पाकिस्तान की रणनीतिक और मिसाइल क्षमताओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा है कि पारंपरिक और रणनीतिक सैन्य क्षमताओं के कमांड में बदलाव से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा। भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद सुरक्षा तनाव को देखते हुए पाकिस्तान के सैन्य कमांड में होने वाले किसी भी बड़े बदलाव पर भारत की नजर रहना स्वाभाविक है।
क्या असीम मुनीर बनेंगे पाकिस्तान के सबसे ताकतवर सैन्य अधिकारी ?
नए कानून के बाद असीम मुनीर की शक्तियों को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति पद संभालने या पाकिस्तान की पूरी राजनीतिक सत्ता अपने हाथ में लेने जैसे दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक संवैधानिक या सरकारी दस्तावेज जरूरी होंगे। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि Defence Forces of Pakistan Act 2026 के बाद पाकिस्तान के सैन्य कमांड सिस्टम में अहम बदलाव हुआ है और इससे सेना की संस्थागत भूमिका को लेकर बहस और तेज हो गई है।




