इस्लामाबाद/काबुल, 26 अगस्त 2026 : अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना बदख्शान प्रांत में तालिबान विरोधी विद्रोहियों के साथ मिलकर काम कर रही है। तालिबान के एक मंत्री ने भी पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अफगानिस्तान किसी भी देश की ‘दासता’ स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि काबुल की ओर से अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।
बदख्शान में क्या हो रहा है ?
अफगानिस्तान के बदख्शान प्रांत में तालिबान शासन के खिलाफ सशस्त्र विरोध की खबरें सामने आई हैं। यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और चीन, ताजिकिस्तान तथा पाकिस्तान से जुड़े व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों के बीच इसका महत्व बढ़ जाता है। इसी दौरान तालिबान ने अपने बदख्शान के गवर्नर को भी पद से हटा दिया। इसके बाद तालिबान नेतृत्व की ओर से पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए गए। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद के अनुसार, बदख्शान में विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सेना के जवानों की मौजूदगी थी। तालिबान का दावा है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
‘पाकिस्तान की गुलामी मंजूर नहीं’
अफगानिस्तान के ग्रामीण पुनर्वास और विकास मंत्री अब्दुल लतीफ मंसूर ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान ने पहले सोवियत संघ और अमेरिका के दबाव को स्वीकार नहीं किया और अब वह पाकिस्तान की अधीनता भी स्वीकार नहीं करेगा। मंसूर ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अफगानिस्तान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई जारी रहती है तो तालिबान इसका जवाब देगा। तालिबान की यह भाषा दोनों देशों के बीच बढ़ती तल्खी को दर्शाती है।
TTP बना पाकिस्तान-तालिबान विवाद की बड़ी वजह
पाकिस्तान और तालिबान के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजहों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का मुद्दा शामिल है। इस्लामाबाद लंबे समय से अफगानिस्तान में मौजूद TTP के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान धरती का इस्तेमाल उसके खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, तालिबान पाकिस्तान के दबाव में अपनी नीतियां बदलने के लिए तैयार नहीं दिखता। इसी वजह से दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बना हुआ है।
पाकिस्तान ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
तालिबान के आरोप सामने आने के बाद पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने उन्हें खारिज कर दिया।पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि बदख्शान में हिंसा अफगानिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का परिणाम है और इसमें पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं है। इस्लामाबाद ने कहा है कि तालिबान सरकार अपने शासन से पैदा हुई समस्याओं का सामना खुद करे। पाकिस्तान के मुताबिक वह पड़ोसी देश में शांति व स्थिरता चाहता है और अफगानिस्तान को अस्थिर करने में उसकी कोई रुचि नहीं है।
क्या पाकिस्तान तालिबान विरोधियों की मदद कर रहा है ?
यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान TTP को लेकर तालिबान पर दबाव बढ़ाने के लिए अफगानिस्तान में उसके विरोधियों को समर्थन दे सकता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। अगर भविष्य में पाकिस्तानी हस्तक्षेप के ठोस सबूत सामने आते हैं, तो इससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।
भारत से तालिबान की नजदीकी भी वजह ?
पाकिस्तान और तालिबान के बीच तनाव के पीछे सिर्फ TTP का मुद्दा नहीं है। अफगानिस्तान और भारत के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर भी इस्लामाबाद की चिंता रही है। तालिबान शासन और भारत के बीच कूटनीतिक एवं आर्थिक संपर्क बढ़ने की स्थिति पाकिस्तान के लिए रणनीतिक चुनौती मानी जा सकती है। ऐसे में अफगानिस्तान की विदेश नीति में भारत की बढ़ती भूमिका भी क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर रही है।
आगे बढ़ सकता है तनाव
बदख्शान में हिंसा, TTP का मुद्दा और पाकिस्तान-तालिबान के बीच आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना सकते हैं। फिलहाल तालिबान पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि इस्लामाबाद उन्हें पूरी तरह नकार रहा है। ऐसे में असली स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्यों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।




