इस्लामाबाद, 24 अगस्त 2026 : पाकिस्तान में राजनीतिक और क्षेत्रीय तनाव के बीच सिंध प्रांत में अलग ‘सिंधुदेश’ की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया हौ। हैदराबाद में आयोजित ‘वहदत-ए-सिंध मार्च’ में सिंधी राष्ट्रवादी दलों और कार्यकर्ताओं ने जमकर हिस्सा लिया। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने सिंध की जमीन, पानी और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ कड़ा विरोध जताया।

हैदराबाद में ‘वहदत-ए-सिंध’ मार्च

सिंध एक्शन कमिटी (SAC) के बैनर तले हैदराबाद में हुए मार्च में सिंध यूनाइटेड पार्टी, अवामी तहरीक और जीए सिंध कौमी महाज समेत कई संगठनों के नेता और कार्यकर्ता विशेष रूप से शामिल हुए। इस प्रदर्शनकारियों ने सिंध की भौगोलिक और आर्थिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियों का विरोध किया। ‘वहदत-ए-सिंध’ का अर्थ ‘अविभाजित सिंध’ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिंध के भीतर नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जमीन और पानी के मुद्दे पर भी विरोध

प्रदर्शन के दौरान जलालपुर नहर परियोजना और कॉर्पोरेट खेती जैसी योजनाओं को लेकर भी आपत्ति जताई गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ऐसी परियोजनाओं से सिंध के जमीन और जल संसाधनों पर स्थानीय लोगों का नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP), पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तानी सेना की नीतियों पर भी सवाल उठाए।

क्या पाकिस्तान में 12 प्रांत बनाने की योजना है ?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में मौजूदा चार प्रांतों—पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को कई प्रशासनिक इकाइयों में बांटने की चर्चा चल रही है। हालांकि अब तक ऐसे किसी आधिकारिक फैसले की पुष्टि सामने नहीं आई है। इसी कथित योजना को लेकर सिंध के राष्ट्रवादी संगठनों में नाराजगी बढ़ी है। प्रदर्शनकारियों का साफतौर पर कहना है कि सिंध की पहचान और क्षेत्रीय अखंडता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है।

क्या सिंध भी बलूचिस्तान की राह पर ?

सिंध में अलग पहचान और स्वायत्तता से जुड़ी मांगें नई नहीं हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शनों ने इसे फिर चर्चा में ला दिया है। बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियां और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष जारी है। अब सिंध के कई हिस्सों में भी कथित बंटवारे और संसाधनों से जुड़े मुद्दों के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। मिठी में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की भी खबर है। वहीं, PPP पहले ही सिंध के विभाजन से जुड़े किसी प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर चुकी है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिंध में उठ रही ‘सिंधुदेश’ की आवाज आगे चलकर बड़ा राजनीतिक आंदोलन बनेगी या फिर यह विरोध सीमित स्तर तक ही रहेगा ?