काठमांडू, 13 अगस्त 2026 : नेपाल के सुनसरी जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर पाकिस्तानी कनेक्शन और ISI एंगल की चर्चा अब तेज हो गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेपाल की खुफिया एजेंसियां सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय विदेशी धर्मगुरुओं और संभावित नेटवर्क की जांच कर रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

सुनसरी हिंसा के बाद खुफिया एजेंसियां अलर्ट

26 जुलाई को सुनसरी जिले के कप्तानगंज इलाके में कावड़ यात्रा के दौरान धार्मिक झंडे लगाने और तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर विवाद हुआ था। देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। हालात पर काबू पाने के लिए नेपाल पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत की खबर सामने आई। इसके बाद तनाव का असर नेपाल के मधेश और कोशी प्रांत के कुछ अन्य इलाकों तक पहुंचने की बात सामने आई। कई जगहों पर कर्फ्यू लगाया गया और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।

पाकिस्तानी मौलाना का नाम सामने आने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल की राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग की एक रिपोर्ट में कुछ विदेशी धार्मिक लोगों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें पाकिस्तानी मूल के मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान और काठमांडू की एक मस्जिद के इमाम मुफ्ती अबू बकर कासमी का नाम लिए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी धर्मगुरुओं की आवाजाही और गतिविधियों की जांच की सिफारिश किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि इन लोगों की गतिविधियों का हिंसा से सीधा संबंध साबित हुआ है।

भारत-नेपाल सीमा पर क्यों बढ़ी चिंता ?

भारत और नेपाल के बीच लंबी और खुली सीमा होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती क्षेत्रों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखती हैं। ऐसे में नेपाल में किसी विदेशी नेटवर्क की संभावित सक्रियता को भारत की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट में भारत-नेपाल सीमा के आसपास ISI की कथित गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन दावों को लेकर स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

नेपाल सरकार ने उठाए क्या कदम ?

हिंसा के बाद नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को तैनात किया गया। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और हिंदू संगठनों के साथ बातचीत भी की। इसके अलावा, रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में स्थित मदरसों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

दंगों की शुरुआत कैसे हुई ?

सुनसरी में विवाद धार्मिक यात्रा के दौरान झंडे लगाने और तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ था। शुरुआती विवाद ने जल्द ही सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया। इसके बाद प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने पड़े। अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह पता लगाना अहम है कि हिंसा केवल स्थानीय विवाद का नतीजा थी या इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भी भूमिका थी।