वॉशिंगटन, 2 नवंबर 2026 : अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म इलेक्शन के लिए वोटिंग होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब डोनाल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति बने अभी करीब-करीब 22 महीने ही हुए हैं और राष्ट्रपति चुनाव को महज दो साल हुए हैं तो फिर अमेरिका में दोबारा चुनाव क्यों कराए जा रहे हैं ?दरअसल अमेरिका में हर चार साल में राष्ट्रपति चुनाव होते हैं, मगर इस बीच यानी राष्ट्रपति के कार्यकाल के ठीक दो साल बाद मिडटर्म इलेक्शन कराए जाते हैं। इन चुनावों में राष्ट्रपति की कुर्सी दांव पर नहीं होती बल्कि अमेरिकी संसद में उनकी पार्टी की ताकत का फैसला होता है। मिडटर्म इलेक्शन में अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव होता है। वहीं सीनेट की एक-तिहाई सीटों के लिए भी वोटिंग होती है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर और स्थानीय पदों के चुनाव कराए जाते हैं। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए बेहद अहम होंगे। अगर उनकी रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत बरकरार रखती है तो सरकार के लिए अपने एजेंडे और नीतियों को लागू करना आसान होगा। लेकिन अगर डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती है, तो ट्रंप के फैसलों और विधायी एजेंडे में रुकावटें आ सकती हैं।
भारत से कितना अलग है अमेरिका का चुनावी सिस्टम ?
भारत में लोकसभा चुनाव आमतौर पर हर पांच साल में होते हैं। लोकसभा में बहुमत हासिल करने वाली पार्टी या गठबंधन सरकार बनाता है। वहीं, अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव अलग होता है और संसद के चुनाव भी अलग-अलग समय पर होते हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है, जबकि संसद के निचले सदन के सदस्यों का कार्यकाल दो साल और सीनेटरों का कार्यकाल छह साल होता है। यही वजह है कि राष्ट्रपति चुनाव के बीच अमेरिकी मतदाता संसद की संरचना बदल सकते हैं।
अगर ट्रंप की पार्टी चुनाव हार गई तो क्या होगा ?
अगर मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी संसद के किसी एक या दोनों सदनों में बहुमत गंवा देती है तो ट्रंप के लिए कानून पास कराना काफी मुश्किल हो सकता है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी संसदीय समितियों और विधायी प्रक्रिया पर ज्यादा नियंत्रण हासिल कर सकती है। हालांकि मिडटर्म इलेक्शन में हारने का मतलब यह नहीं है कि ट्रंप को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ेगा। उनका चार साल का कार्यकाल जारी रहेगा पर संसद में कमजोर समर्थन के कारण उन्हें अपने राजनीतिक फैसलों और नीतियों को लागू करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव इसलिए अहम माने जाते हैं क्योंकि इनके नतीजे यह संकेत देते हैं कि राष्ट्रपति के कामकाज से जनता कितनी संतुष्ट या फिर नाराज है।






