तेहरान, 22 अक्टूबर 2026 : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम कराने की कोशिशों में पाकिस्तान की भूमिका को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर 20 अक्टूबर को तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने ईरान के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत की। इस दौरान ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाने से पहले वॉशिंगटन को तेहरान की शर्तें माननी होंगी। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी नेताओं ने अमेरिका की धमकियों और दबाव की नीति पर नाराजगी जताई। हालांकि असीम मुनीर को ईरान में अपमानित किए जाने और उनके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कोई औपचारिक अल्टीमेटम पहुंचाए जाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
असीम मुनीर से क्या बोले ईरानी नेता ?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ बातचीत की। ईरानी पक्ष के मुताबिक, गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को तेहरान का भरोसा दोबारा हासिल करने के लिए पहले उसकी शर्तों पर कदम उठाने होंगे। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसिन रेजई ने भी परमाणु सामग्री देश से बाहर भेजने की संभावना खारिज की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत तब तक आगे नहीं बढ़ सकती, जब तक वॉशिंगटन भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाता।
ईरान की 7 शर्तें क्या हैं ?
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कई शर्तें रखी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें प्रमुख मांगें शामिल हैं :
- ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी हटाना।
- ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध समाप्त करना।
- क्षेत्रीय मोर्चों पर जारी शत्रुता खत्म करना।
- अमेरिका की ओर से भरोसा बहाल करने के ठोस कदम उठाना।
ईरान का कहना है कि केवल दबाव या धमकियों से उसकी रणनीतिक नीति नहीं बदलेगी। तेहरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्यों उठ रहे सवाल ?
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन ईरान की ओर से अपनी शर्तों पर सख्त रुख अपनाए जाने से इस मध्यस्थता की राह आसान नहीं दिख रही है।ईरानी नेताओं ने बातचीत में अमेरिका के प्रति अविश्वास जताया और कहा कि किसी भी समझौते के लिए पहले भरोसा कायम करना जरूरी है। ऐसे में पाकिस्तान के सामने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की चुनौती बनी हुई है।
आगे क्या होगा ?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं, मगर दोनों देशों के रुख में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी चिंताएं जता रहा है। अब देखना होगा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत आगे बढ़ती है या दोनों देशों के बीच तनाव और गहराता है।




