वॉशिंगटन, 22 अक्टूबर 2026 : प्रकृति को बचाने के लिए हमेशा आधुनिक तकनीक या बड़े-बड़े प्रोजेक्ट की जरूरत नहीं होती है। कभी-कभी वन्यजीव भी पारिस्थितिक तंत्र को दोबारा मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अमेरिका के ओक्लाहोमा में अमेरिकी बाइसन इसका एक शानदार उदाहरण बनकर उभरे हैं। साल 1993 में 300 बाइसन से शुरू हुआ संरक्षण अभियान अब हजारों जानवरों के झुंड तक पहुंच चुका है। इनकी मौजूदगी से दुर्लभ घास के मैदानों के प्राकृतिक संतुलन को बहाल करने में मदद मिल रही है।

1993 में 300 बाइसन से हुई थी शुरुआत

ओक्लाहोमा के पशुपालक केनेथ और डायना एडम्स ने 1993 में अपने केन-एडा रैंच से 300 अमेरिकी बाइसन दान किए थे। इन्हें द नेचर कंजरवेंसी के जोसेफ एच. विलियम्स टॉलग्रास प्रेयरी प्रिजर्व में छोड़ा गया। इस झुंड का नाम दानदाताओं की बेटी के नाम पर क्रिस्टीना एडम्स बाइसन हर्ड रखा गया। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ बाइसन की आबादी बढ़ाना नहीं था, बल्कि उस प्राकृतिक घास के मैदान को भी फिर से जीवंत करना था, जहां कभी ये जानवर बड़ी संख्या में विचरण करते थे। तीन दशक से अधिक समय में यह झुंड बढ़कर हजारों में पहुंच गया है। गर्मियों में यहां बाइसन की संख्या लगभग 2,700 तक पहुंच सकती है।

39,650 एकड़ में फैला है संरक्षित क्षेत्र

ओक्लाहोमा के पॉहस्का के पास स्थित जोसेफ एच. विलियम्स टॉलग्रास प्रेयरी प्रिजर्व लगभग 39,650 एकड़ में फैला है। यह दुनिया में बचे टॉलग्रास प्रेयरी के सबसे बड़े संरक्षित हिस्सों में से एक है। कभी उत्तरी अमेरिका के 14 राज्यों में फैले ये घास के मैदान खेती के विस्तार और शहरी विकास के कारण लगातार सिमटते गए। द नेचर कंजरवेंसी के मुताबिक, मूल टॉलग्रास प्रेयरी का 4 प्रतिशत से भी कम हिस्सा अब बचा है। ऐसे में इस क्षेत्र का संरक्षण जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

बाइसन कैसे बचा रहे हैं प्राकृतिक संतुलन ?

अमेरिकी बाइसन सिर्फ घास खाने वाले बड़े जानवर नहीं हैं। उनकी चराई और जमीन पर गतिविधियां घास के मैदानों की बनावट को प्रभावित करती हैं।

  • पौधों की विविधता : बाइसन की चराई से कुछ पौधों का प्रभुत्व कम होता है और दूसरी वनस्पतियों को बढ़ने का अवसर मिलता है।
  • मिट्टी में पोषक तत्व : उनके गोबर से पोषक तत्व मिट्टी में वापस पहुंचते हैं।
  • वन्यजीवों को सहारा : विविध वनस्पतियां दूसरे जीवों के लिए भोजन और आश्रय उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।
  • प्राकृतिक प्रक्रियाओं की बहाली : नियंत्रित आग और बाइसन की चराई को साथ लेकर घास के मैदानों का प्रबंधन किया जाता है।

इस तरह बाइसन की वापसी से केवल एक प्रजाति को संरक्षण नहीं मिला, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने में मदद मिली है।

हर साल होती है बाइसन की स्वास्थ्य जांच

बाइसन की बड़ी आबादी का प्रबंधन करना भी संरक्षण अभियान का अहम हिस्सा है। हर साल शरद ऋतु में कर्मचारियों और स्थानीय पशुपालकों की मदद से झुंड को एकत्र किया जाता है। इस दौरान जानवरों का वजन, स्वास्थ्य और प्रजनन संबंधी जानकारी दर्ज की जाती है तथा जरूरी टीके लगाए जाते हैं। पहचान और निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक ईयर टैग का भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे संरक्षण दल को झुंड की स्थिति समझने और उसके बेहतर प्रबंधन में मदद मिलती है।

संरक्षण की एक मिसाल बना ओक्लाहोमा

300 बाइसन से शुरू हुई यह पहल बताती है कि किसी मूल प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास में वापस लाना पर्यावरण संरक्षण की बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, केवल बाइसन की संख्या बढ़ना पूरे इकोसिस्टम की बहाली का एकमात्र पैमाना नहीं है। वनस्पतियों, मिट्टी, अन्य वन्यजीवों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ओक्लाहोमा का यह प्रयास दिखाता है कि वैज्ञानिक प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को साथ लेकर चलने से दुर्लभ पारिस्थितिक तंत्रों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की जा सकती है।