इस्लामाबाद, 24 अगस्त 2026 : पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ग्वादर पोर्ट को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। ग्वादर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC का अहम हिस्सा है और यहां चीन का बड़ा निवेश है। इसी बीच ग्वादर को पाकिस्तान सरकार के सीधे नियंत्रण में लाने की कथित चर्चाओं पर स्थानीय स्तर से विरोध की आवाजें उठी हैं। जमात-ए-इस्लामी बलूचिस्तान के प्रमुख मौलाना हिदायतुर रहमान ने चेतावनी दी है कि अगर ग्वादर को बलूचिस्तान सरकार के नियंत्रण से हटाकर केंद्र या सेना के अधीन लाने की कोशिश की गई तो स्थानीय लोग इसका विरोध करेंगे।

ग्वादर को लेकर क्या है पूरा विवाद ?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने और कुछ क्षेत्रों को संघीय क्षेत्र घोषित करने को लेकर चर्चा चल रही है। इसी क्रम में ग्वादर को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं। हिदायतुर रहमान ने दावा किया कि ऐसी चर्चाओं के जरिए लोगों की प्रतिक्रिया परखी जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्वादर के लोगों पर कोई फैसला जबरन थोपा गया तो उसका कड़ा विरोध किया जाएगा। हालांकि ग्वादर को बलूचिस्तान से अलग करने या उसे संघीय क्षेत्र बनाने की अब तक कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में किए जा रहे दावों को फिलहाल राजनीतिक बयान और अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

चीन के लिए क्यों अहम है ग्वादर ?

ग्वादर पोर्ट चीन के China-Pakistan Economic Corridor (CPEC) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बंदरगाह अरब सागर के किनारे स्थित है और चीन की पश्चिमी सीमा से समुद्री संपर्क के लिहाज से रणनीतिक महत्व रखता है। CPEC के तहत चीन ने पाकिस्तान में सड़क, ऊर्जा और बंदरगाह से जुड़े कई प्रोजेक्ट में निवेश किया है। ग्वादर इसी परियोजना का प्रमुख केंद्र है। यही वजह है कि ग्वादर में चीन की मौजूदगी को लेकर बलूच संगठनों और स्थानीय समूहों की आपत्तियां लंबे समय से सामने आती रही हैं।

सेना की मौजूदगी पर भी उठे सवाल

हिदायतुर रहमान ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की चौकियों की भी खूब आलोचना की। उनका आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर स्थापित कुछ चौकियां स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सेना ने ग्वादर के संबंध में कोई फैसला थोपने की कोशिश की तो बलूचिस्तान की राजनीतिक ताकतें और स्थानीय लोग उसका जमकर विरोध करेंगे।

CPEC प्रोजेक्ट को लेकर बलूच संगठनों का विरोध

बलूचिस्तान में चीन के निवेश और CPEC से जुड़े प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में रहे हैं। स्थानीय बलूच समूहों का आरोप है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का पर्याप्त लाभ स्थानीय आबादी को नहीं मिल रहा, जबकि चीन व पाकिस्तान को इसका अधिक फायदा मिल रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार CPEC को देश की आर्थिक और रणनीतिक तरक्की के लिए महत्वपूर्ण परियोजना मानती है।

चीन के नागरिक भी रहे हैं निशाने पर

बलूचिस्तान में सक्रिय उग्रवादी संगठनों ने पहले भी चीनी नागरिकों और CPEC से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण चीन ने पाकिस्तान में अपने नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर कई बार चिंता जताई है। ऐसे माहौल में ग्वादर पर नियंत्रण और चीन की बढ़ती मौजूदगी से जुड़ी कोई भी राजनीतिक चर्चा क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

ग्वादर पर आगे क्या होगा ?

फिलहाल ग्वादर को बलूचिस्तान से अलग कर संघीय क्षेत्र बनाने या सीधे पाकिस्तान के नियंत्रण में देने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है, मगर इस मुद्दे पर उठ रही राजनीतिक बयानबाजी ने पाकिस्तान के भीतर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। ग्वादर का रणनीतिक महत्व, चीन का CPEC निवेश और बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रहा असंतोष-इन तीनों वजहों से आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार, सेना और स्थानीय राजनीतिक संगठनों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना पर नजर रहेगी।