नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 21 अक्टूबर 2026 : भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु रणनीति को लेकर बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में है। पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी के सलाहकार और पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मजहर जमील ने आरोप लगाया है कि भारत पाकिस्तान के भीतर अस्थिरता पैदा करने के लिए कथित तौर पर ‘डोभाल डॉक्ट्रिन’ पर काम कर रहा है। उन्होंने भारत की परमाणु नीति और उसकी संभावित First Strike Capability को लेकर भी सवाल उठाए हैं। लेफ्टिनेंट जनरल मजहर जमील ने ये दावे 13 अक्टूबर 2026 को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) में अपने संबोधन के दौरान किए।
पाकिस्तान ने भारत पर लगाए गंभीर आरोप
मजहर जमील ने दावा किया कि भारत पाकिस्तान में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठनों को कथित तौर पर समर्थन दे रहा है। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में 1971 के मुक्ति संग्राम और 1980 के दशक में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। हालांकि, इन बयानों से भारत की मौजूदा नीति या कथित गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। ऐसे आरोपों को भारत-पाकिस्तान के बीच जारी रणनीतिक और राजनीतिक तनाव के संदर्भ में देखना जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर क्या कहा ?
अपने संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल जमील ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए दावा किया कि भारत ने इस दौरान दोहरी क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइलों का इस्तेमाल किया। दोहरी क्षमता का अर्थ ऐसी मिसाइलों से है, जो पारंपरिक या परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हों। यहां एक महत्वपूर्ण तथ्यात्मक अंतर समझना जरूरी है। ब्रह्मोस को भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के रूप में जाना जाता है, जो पारंपरिक हथियार ले जाने के लिए विकसित की गई है। जमील वर्ष 2015 से 2017 के बीच पाकिस्तान की सेना के Strategic Plans Division के महानिदेशक रह चुके हैं। यह इकाई पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े रणनीतिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत की No First Use Policy पर सवाल
भारत की घोषित परमाणु नीति का एक प्रमुख हिस्सा No First Use Policy है। इसका सामान्य अर्थ है कि भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर कायम रहने की बात कहता है।मजहर जमील ने इस नीति पर सवाल उठाते हुए इसे कूटनीतिक संदेश बताया और दावा किया कि भारत अपनी परमाणु रणनीति में पहले हमले की क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने परमाणु पनडुब्बियों से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और परमाणु हथियारों की तैनाती का उल्लेख किया। हालांकि, किसी देश की संभावित सैन्य क्षमता, उसकी वास्तविक तैनाती और घोषित परमाणु नीति अलग-अलग विषय हैं। केवल मिसाइल या पनडुब्बी की क्षमता के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी देश ने पहले परमाणु हमला करने का फैसला कर लिया है।
शिवशंकर मेनन की किताब का भी किया जिक्र
जमील ने भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की वर्ष 2017 में प्रकाशित पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि भारत की परमाणु नीति में पहले हमले से जुड़े विकल्पों पर चर्चा हुई है। इस संदर्भ में दो बातों के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी रणनीतिक पुस्तक में संभावित परिस्थितियों और नीतिगत विकल्पों पर चर्चा होना, सरकार की आधिकारिक नीति में बदलाव होने के समान नहीं है। इसी तरह, First Strike Capability और No First Use Policy एक ही अवधारणा नहीं हैं। भारत की परमाणु नीति और उसकी सैन्य क्षमताओं का आकलन करते समय आधिकारिक घोषणाओं, विश्वसनीय रणनीतिक अध्ययनों और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी को अलग-अलग देखना आवश्यक है।
भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु तनाव क्यों अहम ?
भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु हथियार संपन्न देश हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच सैन्य क्षमता, मिसाइल तैनाती और परमाणु सिद्धांतों को लेकर दिए जाने वाले बयान क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाते हैं। मजहर जमील के हालिया बयान पाकिस्तान के नजरिए को सामने रखते हैं, लेकिन उनके आरोप अपने आप में भारत की मंशा या परमाणु रणनीति में किसी बदलाव का प्रमाण नहीं हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि दावों और वास्तविक सैन्य तथ्यों के बीच अंतर कैसे किया जाए। ‘डोभाल डॉक्ट्रिन’ और भारत की परमाणु नीति को लेकर पाकिस्तान के सलाहकार के दावों ने रणनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।




