काठमांडू, 26 अगस्त 2026 : भारत और नेपाल के रिश्ते सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों पर टिके हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक मतभेद जरूर सामने आए हैं, मगर इसके बावजूद भारत ने नेपाल के साथ अपने जुड़ाव को नए क्षेत्रों तक विस्तार दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक नेपाल में चीन के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव के बीच भारत ने Soft Power, Humanitarian Support और Technology Partnership को अपनी कूटनीति का अहम हिस्सा बनाया है। मौजूदा समय में तीन क्षेत्रों—सेना, स्टार्टअप और डिजिटल पेमेंट— के जरिए दोनों देशों की साझेदारी को नया आयाम मिलता दिख रहा है।

सेना के जरिए मजबूत हो रहे रिश्ते

भारत और नेपाल के रक्षा संबंध लंबे समय से विशेष महत्व रखते हैं। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के दौरान कई ऐसे कार्यक्रम हुए, जिन्होंने दोनों देशों के सैन्य व सामाजिक संबंधों को सामने रखा। नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से भारतीय सेना प्रमुख को नेपाली सेना में मानद जनरल का पद मिलना दोनों देशों के पारंपरिक रक्षा संबंधों का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा टुंडिखेल में श्रद्धांजलि, शिवपुरी में स्टूडेंट ऑफिसर्स से मुलाकात और पोखरा में पूर्व सैनिकों की रैली जैसे कार्यक्रमों ने भारत-नेपाल के सैन्य संबंधों को केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रहने दिया। नेपाल में बड़ी संख्या में पूर्व गोरखा सैनिकों के भारत से ऐतिहासिक संबंध हैं। यही वजह है कि रक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच सामाजिक संपर्क का भी महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।

स्टार्टअप के जरिए युवाओं को जोड़ रहा भारत

भारत-नेपाल संबंधों में एक नया क्षेत्र Startup Partnership है। इंडिया-नेपाल स्टार्टअप पार्टनरशिप नेटवर्क यानी IN-SPAN के जरिए नेपाली युवा उद्यमियों को भारत के टेक्नोलॉजी और इनक्यूबेशन इकोसिस्टम से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इस पहल के तहत नेपाली स्टार्टअप्स को IIT मद्रास जैसे भारतीय संस्थानों से जुड़ने का अवसर मिला है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक नेटवर्क के दो समूह अब तक करीब 50 नेपाली स्टार्टअप्स को सहयोग दे चुके हैं। इनमें Cyber Security, Ed-Tech, Clean-Tech, Agri-Tech और Climate-Tech जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस तरह भारत की भूमिका केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि नेपाल के युवाओं को तकनीक, विशेषज्ञता, बाजार और इनोवेशन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में भी बढ़ती है।

UPI से बढ़ रही डिजिटल कनेक्टिविटी

भारत और नेपाल के रिश्तों में डिजिटल पेमेंट भी एक नया अध्याय जोड़ रहा है। जून 2026 में भारत के UPI और नेपाल के National Payments Interface (NPI) के बीच सीधा पेमेंट लिंक शुरू किया गया। इसे NPCI International Payments Limited (NIPL) और Nepal Clearing House Limited (NCHL) के सहयोग से लागू किया गया है। इससे दोनों देशों के बीच रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट की सुविधा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासकर सीमा पार यात्रा करने वाले लोगों, पर्यटकों और कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा दोनों देशों के आर्थिक संपर्क को आसान बना सकती है।

चीन के मुकाबले भारत की रणनीति कितनी अलग?

नेपाल में चीन की मौजूदगी मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के जरिए बढ़ी है। भारत की रणनीति इसके मुकाबले ज्यादा बहुआयामी दिखाई देती है, जिसमें मानवीय सहायता, सैन्य संबंध, शिक्षा, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल हैं। भारत के लिए नेपाल का महत्व केवल पड़ोसी देश होने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा, व्यापार, धार्मिक पर्यटन, रोजगार और पारिवारिक संबंधों ने एक अलग तरह की सामाजिक कनेक्टिविटी बनाई है। इसी वजह से भारत की कोशिश अब केवल आर्थिक मदद देने की बजाय नेपाल के लोगों और संस्थानों के साथ लंबे समय की साझेदारी विकसित करने की है।

क्या भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ चीन को चुनौती दे सकती है ?

नेपाल में भारत और चीन दोनों का प्रभाव बढ़ाने का प्रयास जारी है। ऐसे में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह नेपाल की संप्रभुता और राजनीतिक संवेदनशीलताओं का सम्मान करते हुए अपनी साझेदारी को मजबूत करे। सेना से लेकर Startup Ecosystem और UPI Connectivity तक भारत जिन क्षेत्रों में नेपाल के साथ जुड़ रहा है, वे लंबे समय में लोगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि नेपाल में भारत की रणनीति को केवल आर्थिक सहायता या कूटनीतिक संबंधों के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। मानवीय रिश्ते + टेक्नोलॉजी + डिजिटल कनेक्टिविटी + संस्थागत सहयोग भारत की नेपाल नीति का नया आधार बनते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इसे चीन के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने वाली रणनीति कहना जल्दबाजी होगी। नेपाल दोनों पड़ोसी देशों के साथ अपने हितों के अनुसार संबंध बनाए रखना चाहता है। ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत और चीन के बीच नेपाल में प्रभाव की प्रतिस्पर्धा और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।