लंदन, 24 अगस्त 2026 : इंग्लैंड में पानी की कमी के बीच लोगों से रोजमर्रा की आदतों में बदलाव कर Water Conservation की अपील की जा रही है। दक्षिण एशियाई परिवारों से चावल को 5-7 बार धोने के बजाय सिर्फ दो बार धोने की सलाह दी गई है। वहीं, मुस्लिम समुदाय से वजू के दौरान बहते नल की जगह एक लीटर के जग का इस्तेमाल करने को ही कहा गया है।

सूखे की मार से जूझ रहा इंग्लैंड

इंग्लैंड के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति के बीच नदियों और जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से कम हो रहा है। ऐसे में पानी की कंपनियां लोगों को घरों में पानी की खपत घटाने के तरीके बता रही हैं। इसी अभियान के तहत दक्षिण एशियाई परिवारों में चावल धोने की आदत को लेकर भी अपील की गई है। इस अभियान में कहा गया है कि कुछ परिवार चावल को पांच से सात बार बहते पानी में धोते हैं। इसके बजाय चावल को दो बार धोने से हर बार करीब पांच लीटर पानी बचाया जा सकता है। लोगों को चावल धोने के बाद बचे पानी को फेंकने के बजाय पौधों में इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

वजू में पानी बचाने की अपील

पानी बचाने के इस अभियान में मुस्लिम समुदाय को भी शामिल किया गया है। कैंब्रिज सेंट्रल मस्जिद के सहयोग से लोगों को वजू के दौरान पानी की खपत कम करने के तरीके बताए जा रहे हैं। अभियान में सलाह दी गई है कि वजू करते समय नल को लगातार खुला रखने के बजाय एक लीटर के जग का इस्तेमाल किया जाए। इस अभियान के मुताबिक बहते नल से वजू करने पर एक बार में करीब छह से 12 लीटर तक पानी खर्च हो सकता है।

पानी बचाने के अभियान पर कितना खर्च ?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस जागरूकता अभियान पर करीब 2.7 लाख पाउंड खर्च किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग समुदायों तक पहुंचकर पानी बचाने के आसान तरीके बताना है। हालांकि अभियान के खर्च को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब ब्रिटेन में परिवार बढ़ते पानी के बिलों का सामना कर रहे हैं, तब इस तरह के जागरूकता अभियान पर बड़ी रकम खर्च करना कितना उचित है।

नेताओं ने भी उठाए सवाल

कंजर्वेटिव नेता माइक वुड ने इस खर्च की आलोचना की है। उनका कहना है कि बढ़ते पानी के बिलों का भुगतान करने वाले परिवार इस तरह के अभियान से खुश नहीं होंगे। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि पानी बचाने की जिम्मेदारी केवल लोगों की रोजमर्रा की आदतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनका तर्क है कि ब्रिटेन की पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को दुरुस्त करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि पानी की बर्बादी रोकने में इससे बड़ा असर पड़ सकता है।