ढाका, 25 अगस्त 2026 : बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे और BRICS शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर देश में बहस एकबार फिर तेज हो गई है। भारत ने तारिक रहमान को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन वह भारत दौरे पर नहीं आए। इसी बीच बांग्लादेशी अर्थशास्त्री और प्रोफेसर गोलम रसूल ने उन्हें कूटनीतिक रुख को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है। प्रोफेसर गोलम रसूल ने ‘प्रोथोम आलो’ में लिखे अपने लेख में कहा कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग से बांग्लादेश को पीछे नहीं हटना चाहिए, लेकिन इसे ऐसी कठोर शर्त भी नहीं बनाना चाहिए जिससे भारत के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के रास्ते बंद हो जाएं।

BRICS में शामिल होना बांग्लादेश के हित में

प्रोफेसर रसूल के मुताबिक भारत की ओर से तारिक रहमान को दिया गया द्विपक्षीय बैठक का निमंत्रण और BRICS के विस्तारित सत्र में बांग्लादेश को मिला निमंत्रण अलग-अलग महत्व रखते हैं।बांग्लादेश को यह निमंत्रण BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर मिला है। ऐसे में BRICS सम्मेलन में शामिल होना केवल भारत के साथ रिश्तों का मामला नहीं, बल्कि बांग्लादेश की क्षेत्रीय और कूटनीतिक भूमिका से भी जुड़ा है। उन्होंने सलाह दी कि अगर BRICS सम्मेलन में भागीदारी और भारत यात्रा से बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है तो इस अवसर को गंवाना समझदारी नहीं होगी।

‘Bangladesh First’ हो विदेश नीति का आधार

प्रोफेसर गोलम रसूल ने कहा कि तारिक रहमान की विदेश नीति का मूल मंत्र ‘Bangladesh First’ होना चाहिए। इसका अर्थ किसी देश का आंख मूंदकर समर्थन या विरोध करना नहीं है। उनके मुताबिक बांग्लादेश को अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, आर्थिक हितों और दीर्घकालीन रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए विदेश नीति के फैसले लेने चाहिए। यही सिद्धांत भारत के साथ संबंधों पर भी लागू होना चाहिए।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर क्या सलाह ?

लेख में कहा गया है कि बांग्लादेश को शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग से पीछे नहीं हटना चाहिए। हालांकि, इस मुद्दे को इतना बड़ा राजनीतिक आग्रह नहीं बनाया जाना चाहिए कि दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत की संभावना ही खत्म हो जाए। प्रोफेसर रसूल के अनुसार, कूटनीति में केवल अपनी मांग पर अड़े रहना पर्याप्त नहीं है। असली सफलता इस बात से तय होती है कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हितों के लिए क्या हासिल करता है।

BRICS में नहीं जाना क्यों माना जा रहा नुकसान ?

बांग्लादेशी एक्सपर्ट की दलील है कि BRICS Summit में भागीदारी से ढाका को क्षेत्रीय स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। खासकर BIMSTEC की अध्यक्षता के दौरान ऐसे मंचों पर मौजूदगी बांग्लादेश के व्यापक कूटनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।इसलिए सलाह साफ है—शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग जारी रहे, लेकिन भारत के साथ बातचीत के दरवाजे भी खुले रहें।