पेरिस/नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026 : दुनिया में बढ़ते रक्षा खर्च के बीच फ्रांस के हथियार कारोबार ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है। 2025 में फ्रांस के रक्षा निर्यात से जुड़े ऑर्डर करीब 21.2 अरब यूरो तक पहुंच गए। फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय की 2026 की संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा देश के इतिहास में सालाना आधार पर तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। फ्रांस के इस बढ़ते रक्षा कारोबार में भारत के साथ हुए Rafale और Scorpene से जुड़े सौदों की भी अहम भूमिका रही है। भारतीय नौसेना के लिए 26 Rafale-M लड़ाकू विमानों और हथियारों का सौदा फ्रांस के लिए प्रमुख रक्षा समझौतों में शामिल रहा।

21.2 अरब यूरो तक पहुंचा फ्रांस का रक्षा निर्यात

फ्रांस को 2025 में कुल 21.2 बिलियन यूरो के रक्षा ऑर्डर मिले। हालांकि यह 2024 के 21.6 अरब यूरो के आंकड़े से थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी यह फ्रांस के लिए अब तक का तीसरा सबसे बड़ा सालाना आंकड़ा है। फ्रांस के रक्षा निर्यात का सबसे बड़ा साल 2022 रहा था। उस साल संयुक्त अरब अमीरात ने 80 Rafale लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया था, जिससे कुल रक्षा ऑर्डर करीब 26.9 अरब यूरो तक पहुंच गए थे।

भारत के Rafale सौदे से फ्रांस को फायदा

फ्रांस के रक्षा कारोबार में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभरा है। भारतीय नौसेना के लिए 26 Rafale-M लड़ाकू विमानों और उनसे जुड़े हथियारों का सौदा फ्रांस के 2025 के प्रमुख रक्षा निर्यात समझौतों में शामिल रहा। Rafale-M को भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों से ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। यह सौदा भारत की समुद्री हवाई क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ फ्रांस के रक्षा उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Scorpene सबमरीन की भी बढ़ी डिमांड

फ्रांस के रक्षा निर्यात में Scorpene पनडुब्बियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2025 में इंडोनेशिया के लिए दो Scorpene पनडुब्बियों के ऑर्डर का जिक्र फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में किया गया है। भारत पहले से ही Scorpene श्रेणी की पनडुब्बियों का संचालन कर रहा है। भारत में इन पनडुब्बियों का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में फ्रांसीसी कंपनी Naval Group के सहयोग से किया गया है।

फ्रांस को किन देशों से मिले बड़े ऑर्डर ?

2025 में फ्रांस को सिर्फ भारत और इंडोनेशिया से ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों से भी बड़े रक्षा ऑर्डर मिले। इनमें ग्रीस के लिए फ्रिगेट, मोरक्को के लिए Caracal हेलीकॉप्टर, लक्ज़मबर्ग के लिए सैन्य संचार उपग्रह और यूरोपीय देशों के लिए विभिन्न सैन्य प्रणालियां शामिल हैं। इसके अलावा फ्रांस की रक्षा कंपनियों ने CAESAR आर्टिलरी सिस्टम, Mistral एयर डिफेंस मिसाइल और सैन्य वाहनों से जुड़े कई समझौते भी किए।

दुनिया में बढ़ रहा रक्षा खर्च

फ्रांस के हथियार निर्यात में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई देश अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में जुटे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में रक्षा खर्च में खास तौर पर बढ़ोतरी देखने को मिली है। यूरोपीय देशों के साथ-साथ एशिया और मध्य पूर्व के कई देश भी लड़ाकू विमान, पनडुब्बी, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम खरीद रहे हैं। इसका सीधा फायदा अमेरिका, फ्रांस और अन्य प्रमुख हथियार निर्यातक देशों की रक्षा कंपनियों को मिल रहा है।

आगे और बढ़ सकता है फ्रांस का Defence Export

भारत के साथ भविष्य के संभावित रक्षा सौदों को देखते हुए फ्रांस के हथियार निर्यात में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। भारत और फ्रांस के बीच Rafale, पनडुब्बियों, मिसाइलों और अन्य रक्षा तकनीक को लेकर सहयोग लगातार बढ़ा है। हालांकि, किसी भी संभावित नए सौदे को आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम माना जाएगा।