ढाका, 26 अगस्त 2026 : बांग्लादेश के रंगपुर में एक हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच से सामने आई जानकारी ने पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 22 अगस्त को माचुआपारा इलाके के एक घर से रिटायर्ड हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे के शव बरामद हुए थे। पुलिस ने शुरुआती जांच में आशंका जताई थी कि वारदात में नशीली दवा ‘याबा’ का सेवन करने वाले लोगों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, फोरेंसिक जानकारी के अनुसार मौत की संभावित टाइमिंग और घटनाक्रम पुलिस की बताई गई कहानी से पूरी तरह मेल नहीं खा रहा है।
गला घोंटकर हत्या की बात सामने आई
फोरेंसिक जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक चारों पीड़ितों की मौत गला घोंटने से हुई। पोस्टमार्टम के दौरान यौन उत्पीड़न के कोई सबूत नहीं मिले। शवों पर किसी रासायनिक पदार्थ के इस्तेमाल के भी संकेत नहीं पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक शव काफी सड़ चुके थे और उनमें कीड़े पड़ गए थे। इसी वजह से मौत का सटीक समय निर्धारित करना भी चुनौतीपूर्ण रहा।
मौत की टाइमिंग ने बढ़ाया रहस्य
सूत्रों के हवाले से बताया गया कि चारों की मौत शव मिलने से करीब दो से चार दिन पहले हुई हो सकती है। यही बिंदु पुलिस की शुरुआती टाइमलाइन पर सवाल खड़ा करता है। जांचकर्ताओं की शुरुआती कहानी के मुताबिक हत्या शुक्रवार को हुई थी और अगले दिन शनिवार को चारों शव बरामद किए गए। लेकिन पोस्टमार्टम से सामने आया अनुमान इस घटनाक्रम से अलग संकेत देता है। हालांकि शवों के ज्यादा सड़ जाने के कारण मौत का समय पूरी सटीकता से निर्धारित करना मुश्किल बताया गया है। इसलिए फोरेंसिक अनुमान को जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन इसे अंतिम निष्कर्ष के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
‘याबा’ वाली थ्योरी भी सवालों के घेरे में
पुलिस की शुरुआती जांच में यह दावा सामने आया था कि संदिग्धों ने वारदात से पहले, उसके दौरान या बाद में याबा नाम की नशीली दवा की कई गोलियां ली थीं। जांचकर्ताओं के अनुसार, हत्या के बाद संदिग्ध कुछ समय तक घर में ही रुके। कथित तौर पर उन्होंने वहां स्नान किया, फ्रिज से खजूर खाए और जाने से पहले याबा का सेवन किया। लेकिन फोरेंसिक सूत्रों से जुड़े एक दावे में इस कहानी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। सवाल यह है कि अगर संदिग्धों ने बड़ी मात्रा में याबा का सेवन किया था, तो क्या वे हत्या के बाद इतनी देर तक घर में रुककर सामान्य गतिविधियां कर सकते थे ?
क्या घर में संघर्ष हुआ था ?
फोरेंसिक जानकारी में चारों शवों पर संघर्ष या हाथापाई के संकेत मिलने की बात भी सामने आई है। इससे जांचकर्ताओं के सामने वारदात के वास्तविक घटनाक्रम को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि चारों की हत्या कब हुई, हमलावर कितने थे और हत्या के बाद वे कितनी देर तक घटनास्थल पर मौजूद रहे।
पुलिस की थ्योरी और फोरेंसिक रिपोर्ट में अंतर
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की शुरुआती कहानी और फोरेंसिक निष्कर्षों के बीच संभावित अंतर को लेकर है। मौत की टाइमिंग, याबा के सेवन और घटनास्थल पर संदिग्धों के कथित व्यवहार को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। फिलहाल जांच एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि पोस्टमार्टम, फोरेंसिक साक्ष्यों, घटनास्थल से मिले सबूतों और संदिग्धों के बयानों को मिलाकर वारदात की वास्तविक कड़ी तैयार की जाए। चार लोगों की हत्या से जुड़े इस मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ हो सकता है कि पुलिस की शुरुआती थ्योरी सही दिशा में थी या फोरेंसिक सबूत किसी दूसरी कहानी की ओर इशारा कर रहे हैं।




