नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026। बच्चों में आंखों की कमजोरी या नजर से जुड़ी समस्या हमेशा शुरुआत में साफ दिखाई नहीं देती। कई बार बच्चा खुद यह नहीं बता पाता कि उसे दूर या पास की चीजें साफ दिखाई नहीं दे रही हैं। ऐसे में माता-पिता को बच्चे की रोजमर्रा की आदतों और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर विजन स्क्रीनिंग और आंखों की जांच से कई समस्याओं की पहचान जल्दी की जा सकती है।

बार-बार आंखें सिकोड़ना हो सकता है संकेत

अगर बच्चा दूर की चीजों को देखने के लिए बार-बार आंखें सिकोड़ता है, तो यह नजर कमजोर होने का संकेत हो सकता है। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों में दूर का बोर्ड देखने में परेशानी या टीवी और दूसरी दूर की चीजों को पास जाकर देखने की आदत पर ध्यान देना चाहिए। मायोपिया यानी निकट दृष्टिदोष में बच्चों को दूर की चीजें धुंधली दिखाई दे सकती हैं।

पढ़ते समय किताब या मोबाइल बहुत पास लाना

बच्चा किताब, कॉपी, मोबाइल या स्क्रीन को आंखों के बहुत करीब रखकर देखता है, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह देखने में परेशानी या आंखों पर ज्यादा जोर पड़ने का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल इस एक लक्षण के आधार पर नजर की कमजोरी तय नहीं की जा सकती और जरूरत पड़ने पर आंखों की जांच कराना जरूरी है।

सिरदर्द और आंखों में थकान

अगर बच्चा पढ़ाई या स्क्रीन देखने के बाद बार-बार सिरदर्द की शिकायत करता है, आंखों को मलता है या आंखों में थकान महसूस करता है, तो इसकी वजह नजर से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। बच्चों में मायोपिया के सामान्य लक्षणों में धुंधला दिखाई देना, आंखें सिकोड़ना, बार-बार आंखें मलना और सिरदर्द शामिल हो सकते हैं।

स्कूल में बोर्ड देखने में परेशानी

कई बार बच्चे घर पर कोई शिकायत नहीं करते, लेकिन स्कूल में ब्लैकबोर्ड या स्मार्ट बोर्ड देखने में परेशानी होती है। अगर बच्चा लगातार आगे बैठने की कोशिश करता है या शिक्षक की लिखी चीजें देखने में दिक्कत बताता है, तो उसकी नजर की जांच कराने पर विचार करना चाहिए।

आंखें टेढ़ी या अलग दिशा में जाना

अगर बच्चे की दोनों आंखें एक साथ एक ही दिशा में फोकस नहीं करतीं या एक आंख अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे की ओर जाती दिखाई देती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। बच्चों में आंखों का गलत संरेखण यानी स्ट्रैबिस्मस (Strabismus) दृष्टि संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।

बार-बार आंखों में पानी या लालिमा

लगातार आंखों से पानी आना, आंखों में खुजली या परेशानी, लंबे समय तक लाल रहना, पस या पपड़ी जमना जैसे लक्षण भी ध्यान देने योग्य हैं। ऐसे लक्षण हमेशा आंखों की कमजोरी के कारण नहीं होते, बल्कि संक्रमण, एलर्जी या दूसरी आंखों की समस्या से भी जुड़े हो सकते हैं।

छोटे बच्चों में किन संकेतों पर दें ध्यान?

छोटे बच्चे अपनी परेशानी बता नहीं पाते। अगर शिशु करीब 3 महीने की उम्र तक किसी चलती वस्तु या चेहरे को आंखों से ठीक तरह ट्रैक नहीं करता या आंखों से स्थिर संपर्क बनाने में परेशानी दिखाता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए। 4 महीने के बाद आंखों का बार-बार अंदर या बाहर की ओर मुड़ना भी जांच की वजह हो सकता है।

हर बच्चे में लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं

आंखों से जुड़ी कुछ समस्याएं बिना स्पष्ट लक्षण के भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, एंब्लायोपिया यानी 'लेजी आई' में बच्चे को शुरुआत में कोई खास परेशानी महसूस नहीं हो सकती। इसलिए केवल बच्चे की शिकायत का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है। नियमित विजन स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण है।

कब करानी चाहिए आंखों की जांच?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार बच्चों की आंखों की जांच बचपन से ही शुरू की जाती है और नियमित हेल्थ चेकअप के दौरान विजन स्क्रीनिंग की जाती है। यदि स्क्रीनिंग में समस्या मिलती है या माता-पिता को बच्चे की नजर को लेकर कोई चिंता है, तो बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ या योग्य आंखों के डॉक्टर से पूरी जांच करानी चाहिए।

माता-पिता इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

  • दूर की चीजें देखने के लिए आंखें सिकोड़ना
  • किताब या मोबाइल बहुत पास लाकर देखना
  • बार-बार आंखें मलना
  • पढ़ाई के बाद सिरदर्द की शिकायत
  • बोर्ड देखने में परेशानी
  • आंखों का बार-बार टेढ़ा होना
  • लगातार आंखों से पानी आना या लालिमा
  • आंखों में दर्द या असहजता
  • बच्चे का किसी वस्तु को ठीक से फोकस न कर पाना