रांची, 22 अगस्त 2026 : झारखंड में सरकारी नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा-2023, CDPO परीक्षा, JPSC 11वीं से 13वीं परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियां रद्द करने वाली सरकारी अधिसूचनाओं के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने प्रभावित नियुक्त अधिकारियों को फिलहाल काम जारी रखने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शुक्रवार को संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से सीआईडी जांच और अब तक हुई कार्रवाई की पूरी जानकारी मांगी। सरकार को 7 सितंबर तक जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
1975 JSSC CGL अधिकारियों को मिली अंतरिम राहत
JSSC CGL परीक्षा-2023 के जरिए नियुक्त करीब 1,975 अधिकारियों और 64 CDPO को हाईकोर्ट के आदेश से फिलहाल राहत मिली है। राज्य सरकार ने 18 अगस्त को संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी, जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि किसी नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत के मुताबिक सरकार के आदेश में फिलहाल ऐसी पर्याप्त सामग्री दिखाई नहीं देती, जिससे इतनी बड़ी कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके।
JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा पर भी रोक
हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा से चयनित और नियुक्त अधिकारियों से जुड़ी नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचना पर भी अंतरिम रोक लगाई है। कोर्ट ने प्रभावित अधिकारियों को फिलहाल अपने पद पर काम जारी रखने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही JPSC फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा-2023 को रद्द करने वाली सरकारी अधिसूचना पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है।
सरकार को सात सितंबर तक देना होगा जवाब
अदालत ने राज्य सरकार को सात सितंबर तक जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों और अब तक हुई कार्रवाई का विवरण देना होगा। वहीं, याचिकाकर्ताओं को 14 सितंबर तक जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर 12:15 बजे होगी।
नियुक्तियां रद्द करने से पहले प्रक्रिया का पालन जरूरी
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि संबंधित परीक्षाओं के जरिए चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों की नियुक्तियां की जा चुकी थीं। ऐसे में पूरी भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियां अचानक रद्द करने से पहले प्रभावित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था। अदालत ने भी प्रथम दृष्टया माना कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बिना नियमित नियुक्तियों को समाप्त नहीं किया जा सकता।
अब सरकार के सामने क्या चुनौती ?
हाईकोर्ट का यह आदेश फिलहाल अंतरिम राहत है। सरकार के पास अपनी कार्रवाई के समर्थन में सीआईडी जांच से जुड़े ठोस साक्ष्य और दस्तावेज अदालत के सामने रखने का अवसर है। अगर सरकार जांच के आधार पर पर्याप्त साक्ष्य पेश करती है, तो मामले की आगे की सुनवाई में स्थिति बदल सकती है। वहीं, पर्याप्त आधार पेश नहीं होने की स्थिति में नियुक्त अधिकारियों को आगे भी राहत मिलने की संभावना बनी रहेगी। फिलहाल इस मामले में JSSC CGL और JPSC से जुड़े अभ्यर्थियों और नियुक्त अधिकारियों की नजर 15 सितंबर की अगली सुनवाई पर है।




