रांची, 23 अगस्त। झारखंड स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 यानी JSSC CGL में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। CID की SIT ने मामले के प्रमुख संदिग्ध अभय कुमार तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है। अभय को पांच दिन की रिमांड पर लिया गया है। पत्नी और भाई की रिमांड अवधि को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी सामने आई है।
18 संदिग्ध अभ्यर्थियों से भी पूछताछ
SIT अब उन अभ्यर्थियों से भी पूछताछ कर रही है, जिनकी भूमिका या चयन प्रक्रिया संदिग्ध मानी जा रही है। जांच एजेंसी ने 18 संदिग्धों को नोटिस देकर पूछताछ की है और उनके बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर परीक्षा में सफलता दिलाने वाले नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
JPSC मामले से भी जुड़ा है अभय का नाम
जांच में अभय तिवारी का नाम 14वीं JPSC परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े से भी जुड़ा है। वह परीक्षा से संबंधित निजी एजेंसी TDPL में काम कर चुका था। CID की जांच अब JPSC और JSSC-CGL से जुड़े संभावित कनेक्शन को भी खंगाल रही है।
पत्नी और भाई की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज
CID ने 18 अगस्त को अभय की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया था। दोनों के JSSC CGL परीक्षा में सफल होने की भी जांच की जा रही है। इससे एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितता किस स्तर तक पहुंची थी।
37 से ज्यादा लोगों से पूछताछ
SIT अब तक 37 से अधिक संदिग्धों और संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए एजेंसी परीक्षा एजेंसी, संदिग्ध अभ्यर्थियों और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
तीन आरोपी अभ्यर्थी भेजे गए जेल
14वीं JPSC मामले में पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क और कथित परीक्षा फर्जीवाड़े की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।




