नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026 : कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के प्रस्तावित संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ को भारत में प्रकाशित किए जाने को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया पर दबाव बनाया गया। वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। विवाद उस समय शुरू हुआ जब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा कि वह सोनिया गांधी की किताब की भारतीय प्रकाशक नहीं है। यह स्पष्टीकरण अमेरिकी प्रकाशन संस्था अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से किताब को 10 नवंबर को प्रकाशित किए जाने की घोषणा के कुछ दिन बाद आया। अल्फ्रेड ए. नॉफ, पेंगुइन रैंडम हाउस की अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन इकाई है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रकाशक ने किताब को लेकर शुरुआती चर्चाओं में रुचि दिखाई थी। हालांकि प्रकाशक का कहना है कि लेखकों की सामग्री की फैक्ट-चेकिंग करना उसकी जिम्मेदारी और अधिकार है।

कांग्रेस ने लगाया दबाव का आरोप

कांग्रेस के लोकसभा उपनेता गौरव गोगोई ने पेंगुइन इंडिया के बयान पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार में ऐसे लोग हो सकते हैं जो इस किताब के सामने आने से चिंतित हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि अगर किताब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो रही है तो भारत में उसके प्रकाशन को लेकर अलग स्थिति क्यों है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी प्रकाशक से सवाल किया कि जब पेंगुइन की अंतरराष्ट्रीय इकाई किताब को प्रकाशित करने के लिए तैयार है, तो भारत में इसके प्रकाशन में क्या अड़चन है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार पर दबाव बनाने का आरोप लगाया।

विपक्ष ने भी कांग्रेस के आरोपों का किया समर्थन

सोनिया गांधी की किताब को लेकर उठे विवाद में कुछ विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस के रुख का समर्थन किया। सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा कि किसी लेखक को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और संस्मरण से अंश हटाने की मांग उचित नहीं मानी जानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर एक प्रकाशक किताब प्रकाशित नहीं करता है तो कोई दूसरा प्रकाशक इसे प्रकाशित करने के लिए आगे आ सकता है।

मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा- लेखक और प्रकाशक का मामला

पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने विवाद को लेखक और प्रकाशक के बीच का मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह तय करना लेखक और प्रकाशक की जिम्मेदारी है कि किताब में संस्मरण है या राजनीतिक दृष्टिकोण को बढ़ाया गया है। नकवी ने यह भी कहा कि अगर किसी किताब में तथ्यात्मक दावे किए गए हैं तो प्रकाशक के लिए उनकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। उनके मुताबिक, प्रकाशन की प्रक्रिया में फैक्ट-चेकिंग और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण होती है।

BJP ने कांग्रेस के आरोपों को बताया राजनीतिक कोशिश

कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले के जरिए लोगों के बीच एक गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी ने कांग्रेस के 'दबाव' वाले आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास बताया। भाजपा नेता अजय आलोक ने भी कांग्रेस पर किताब में तथ्यों और आंकड़ों को स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकाशक के लिए किताब में मौजूद दावों की तथ्य-जांच करना जरूरी है और इसी वजह से प्रकाशन से जुड़े सवाल उठ सकते हैं।

क्यों चर्चा में है सोनिया गांधी की ‘बिलॉन्गिंग’?

सोनिया गांधी की प्रस्तावित किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ उनके जीवन और अनुभवों पर आधारित संस्मरण के तौर पर चर्चा में है। किताब के भारत में प्रकाशन को लेकर उठे सवालों ने इसे राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। फिलहाल विवाद का केंद्र यह है कि भारत में किताब के प्रकाशन को लेकर वास्तव में क्या अड़चन है और क्या इसमें किसी तरह के संपादकीय बदलाव या तथ्य-जांच को लेकर मतभेद हैं। कांग्रेस इसे दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी इसे लेखक-प्रकाशक के बीच सामान्य संपादकीय प्रक्रिया बता रही है।