नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026 : भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े विवाद को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देश अपनी करीब 1,880 किलोमीटर लंबी खुली सीमा के साथ मौजूद दसगजा (No-Man’s Land) में अतिक्रमण और सीमा-पार कब्जे की स्थिति का पता लगाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करेंगे। संयुक्त मैपिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि किन इलाकों में सीमा के दूसरी तरफ की जमीन पर खेती या कब्जा किया जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है, जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक बयान के बाद भारत-नेपाल सीमा को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई थी। हालांकि नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया था कि बालेन शाह की टिप्पणी मुख्य रूप से सीमा क्षेत्र में अतिक्रमण और सीमा-पार कब्जे से जुड़ी थी।
ड्रोन से होगी बॉर्डर की मैपिंग
भारत और नेपाल के सर्वे अधिकारियों की संयुक्त समिति की बैठक में सीमा क्षेत्रों की तकनीकी मैपिंग के लिए UAV यानी ड्रोन के इस्तेमाल पर सहमति बनी है। जिन इलाकों में सीमा-पार कब्जे या दसगजा पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं, वहां ड्रोन से हवाई तस्वीरें और डेटा जुटाया जाएगा। दोनों देशों के अधिकारी इस डेटा का संयुक्त रूप से विश्लेषण करेंगे और एक तकनीकी रिकॉर्ड तैयार करेंगे। इसका उद्देश्य सीमा पर मौजूद वास्तविक स्थिति को लेकर साझा आधार तैयार करना है।
तीन साल में पूरा हो सकता है सर्वे
रिपोर्ट के मुताबिक सीमा-पार कब्जे की मैपिंग को पूरा करने के लिए करीब तीन साल की समय-सीमा रखी गई है। मॉनसून के बाद अक्टूबर से इस प्रक्रिया की शुरुआत होने की संभावना है। मैपिंग पूरी होने के बाद दोनों देशों के पास यह पता लगाने के लिए तकनीकी जानकारी होगी कि कहां-कहां सीमा-पार कब्जे या अतिक्रमण की स्थिति है। इसके आधार पर आगे जमीन खाली कराने, जमीन वापस लेने या मुआवजे जैसे मुद्दों पर बातचीत की जा सकती है।
क्या है दसगजा ?
दसगजा भारत-नेपाल सीमा पर मौजूद करीब 10 गज चौड़ी ऐसी पट्टी है, जिसे नो-मैन’s लैंड कहा जाता है। इस क्षेत्र में अतिक्रमण दोनों देशों के बीच लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। खासकर नदी वाले इलाकों में सीमा को लेकर स्थिति और जटिल हो जाती है। नदियों का रास्ता बदलने और जमीन के स्थानीय इस्तेमाल में बदलाव के कारण कई बार यह सवाल उठता है कि जमीन तकनीकी रूप से किस देश की सीमा में आती है।
क्या कहा था बालेन शाह ने ?
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मई में संसद में भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर भारत ने नेपाली जमीन पर कब्जा किया है, तो नेपाल ने भी भारतीय जमीन पर कब्जा किया है। उनकी टिप्पणी के बाद नेपाल में भी राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ और विपक्षी सांसदों ने इस दावे को लेकर स्पष्टीकरण और सबूत मांगे थे। बाद में नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी मुख्य रूप से दसगजा और सीमा-पार अतिक्रमण के संदर्भ में थी, न कि भारत के खिलाफ किसी नए क्षेत्रीय दावे के तौर पर।
अब तकनीकी डेटा से होगी स्थिति साफ
ड्रोन मैपिंग के बाद भारत व नेपाल के पास सीमा क्षेत्र की स्थिति का संयुक्त तकनीकी रिकॉर्ड तैयार होगा। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच भविष्य की बातचीत में मदद मिल सकती है और विवादित इलाकों की स्थिति को लेकर अलग-अलग दावों की जगह तथ्यात्मक डेटा सामने रखा जा सकेगा।




