मुंबई, 21 अगस्त 2026 : 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में फरार आरोपियों के खिलाफ भारत ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। मुंबई पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी समेत छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के जरिए समन या उद्घोषणा आदेश तामील कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया है। इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत में शुक्रवार को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर उज्ज्वल निकम ने पुलिस की ओर से अंतरिम रिपोर्ट पेश की। उन्होंने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर पाकिस्तान में मौजूद आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई कराने का अनुरोध किया गया था। गृह मंत्रालय ने तीन अगस्त को इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की स्थिति से अवगत कराने के लिए समय मांगा है।

छह फरार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

मुंबई आतंकी हमले के मामले में अदालत ने हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी के अलावा साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ अबू कहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा के खिलाफ उद्घोषणा आदेश जारी किए हैं। ये सभी आरोपी पाकिस्तानी नागरिक हैं और फिलहाल भारत की गिरफ्त से बाहर हैं।

गैर-मौजूदगी में चल सकता है मुकदमा

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 356 के तहत ऐसे घोषित अपराधियों के खिलाफ उनकी गैर-मौजूदगी में भी आपराधिक मुकदमा चलाने का प्रावधान है, जो गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हैं और जिनकी तत्काल गिरफ्तारी की संभावना नहीं है। इन आरोपियों की कथित भूमिका का उल्लेख 26/11 मामले में पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब और सरकारी गवाह बने डेविड हेडली के बयानों में भी सामने आया था।

26/11 हमले में 166 लोगों की हुई थी मौत

26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में कुल 166 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई की कई महत्वपूर्ण जगहों को निशाना बनाते हुए 60 घंटे से अधिक समय तक आतंक फैलाया था। अजमल कसाब इस हमले में जिंदा पकड़ा गया इकलौता पाकिस्तानी आतंकी था। अदालत ने उसे हत्या और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया था। बाद में 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में उसे फांसी दी गई थी। अब हाफिज सईद, लखवी समेत छह फरार आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के जरिए कार्रवाई की कोशिश को 26/11 मामले में लंबे समय से लंबित कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।