नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026 : केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर हुए खर्च को लेकर अब सियासी बहस तेज हो गई है। CJP ने RTI से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया है कि पिछले 12 वर्षों में लुटियंस दिल्ली स्थित केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर ₹547.68 करोड़ खर्च किए गए। CJP ने सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय और दूसरी बुनियादी सुविधाएं सुधारने में क्यों नहीं किया जा सकता था। इस मुद्दे पर भाजपा ने भी पलटवार करते हुए CJP के आरोपों को खारिज कर दिया और पंजाब जाकर वहां के सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने की बड़ी चुनौती दे दी।

2025-26 में बंगलों के रखरखाव पर ₹92 करोड़ खर्च का दावा

CJP ने एक रिपोर्ट के आधार पर दावा किया कि केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर होने वाला सालाना खर्च 2014-15 में करीब ₹27 करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर करीब ₹92 करोड़ हो गया। पार्टी के मुताबिक, 2014 से 2019 के बीच मंत्रियों के बंगलों के रखरखाव पर ₹133.9 करोड़, 2019 से 2024 के बीच ₹250 करोड़ और 2024 से 2026 के बीच ₹174.5 करोड़ खर्च हुए। इन आंकड़ों को जोड़कर 12 वर्षों का कुल खर्च ₹547.68 करोड़ बताया गया है।

CJP ने पूछा- स्कूलों पर क्यों नहीं खर्च हुआ पैसा ?

CJP ने मंत्रियों के सरकारी आवासों पर होने वाले खर्च को अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जोड़ते हुए मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि ग्रामीण सरकारी स्कूलों में आज भी कई जगह बिजली, पीने के पानी, शौचालय और मिड-डे मील जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। CJP ने अपने अभियान के तहत ग्रामीण सरकारी स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कराने और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग की है।

‘धन की कमी नहीं, इच्छाशक्ति की कमी’

CJP का तर्क है कि सरकारी स्कूलों की बुनियादी जरूरतों के लिए सिर्फ धन की कमी को कारण नहीं बताया जा सकता। पार्टी ने सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जरूरत इस बात की है कि उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल बच्चों और स्कूलों की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी किया जाए। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का दौरा करने का दावा करते हुए वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया।

PM CARES Fund को लेकर भी सवाल

CJP ने इससे पहले PM CARES Fund में मौजूद राशि को लेकर भी सवाल उठाए थे। पार्टी ने पूछा था कि ग्रामीण सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए इस फंड का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा सकता। पार्टी की ओर से PM CARES Fund की 2024-25 की राशि का हवाला देते हुए इसे स्कूलों की जरूरतों से जोड़कर सवाल उठाए गए। हालांकि, PM CARES Fund का गठन आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा राहत जैसे उद्देश्यों के लिए किया गया है।

₹8 करोड़ में आदर्श स्कूल बनाने का दावा

अभिजीत दीपके ने अनुमान लगाया कि आधुनिक सुविधाओं से लैस एक आदर्श सरकारी स्कूल बनाने में करीब ₹8 करोड़ खर्च हो सकते हैं। इसी अनुमान के आधार पर उन्होंने कहा कि उपलब्ध राशि से बड़ी संख्या में आधुनिक स्कूलों का निर्माण संभव हो सकता है। यह आंकड़ा एक अनुमान पर आधारित है और वास्तविक स्कूल निर्माण की लागत स्थान, आकार, सुविधाओं और परियोजना की प्रकृति के अनुसार अलग हो सकती है।

भाजपा ने आरोपों को खारिज किया

CJP के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा ने PM CARES Fund को आपातकालीन और आपदा राहत के लिए बनाया गया फंड बताते हुए CJP पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा की गोवा इकाई ने CJP और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर भी निशाना साधा और आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया।

भाजपा ने दी पंजाब जाने की चुनौती

भाजपा ने अभिजीत दीपके को पंजाब जाकर सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने की चुनौती भी दी। भाजपा ने आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों को लेकर किए जाने वाले ‘विश्वस्तरीय’ दावों पर सवाल उठाए। इस तरह सरकारी बंगलों के रखरखाव पर खर्च से शुरू हुआ विवाद अब सरकारी स्कूलों, PM CARES Fund और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस में बदल गया है। फिलहाल, एक तरफ CJP सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए पलटवार कर रही है।