नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026 : तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा को नादिया सर्किट हाउस विवाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया और सीधे हाई कोर्ट जाने को कहा। सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के नादिया स्थित सर्किट हाउस खाली कराने के प्रशासनिक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि सोमवार को याचिका की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले पर हाई कोर्ट भी सुनवाई कर सकता है।

क्या है पूरा मामला ?

महुआ मोइत्रा का आरोप है कि नादिया जिला प्रशासन ने कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए उन्हें सर्किट हाउस में आवंटित सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा। यह विवाद 14 अगस्त को सामने आया था। महुआ के मुताबिक वह शाम करीब 6:15 बजे सर्किट हाउस पहुंची थीं। उन्हें नियमित कमरा दिया गया और वहां चाय-भोजन भी कराया गया। इसके बाद रात करीब 9:47 बजे अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने फोन कर परिसर खाली करने को कहा। महुआ ने दावा किया कि उन्हें बताया गया कि यह निर्देश ‘ऊपर से’ आया है। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर की ओर से व्हाट्सऐप पर एक आदेश भेजा गया, जिसमें रखरखाव और सफाई कार्य का हवाला दिया गया था।

महुआ के वकील ने क्या कहा ?

सांसद महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए कार्रवाई की है। इस दौरान वकील ने मामले को संघवाद और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। वकील का यह भी कहना था कि हाई कोर्ट पहले ही सुरक्षा से संबंधित आदेश दे चुका था, इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई है, जो एकदम गलत है और नियम की अनदेखी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह याचिका पर विचार नहीं करेगी और महुआ मोइत्रा हाई कोर्ट का रुख कर सकती हैं। इस फैसले के बाद अब मामले में अगली कानूनी लड़ाई पश्चिम बंगाल हाई कोर्ट में होने की संभावना है।