नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026 : मानसून के बीच देश में इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में मौसमी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसे लेकर भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने लोगों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। IMA ने लोगों से सतर्क रहने और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाएं लेने से बचने की अपील की है। भारतीय चिकित्सा संघ के मुताबिक दिल्ली में अब तक 1,770 से अधिक लैब से पुष्टि किए गए H1N1 मामले सामने आ चुके हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में भी संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं।
ICMR की निगरानी में नहीं मिला नया म्यूटेशन
IMA ने बताया कि ICMR की निगरानी में फिलहाल देश में फैल रहा वायरस मौसमी Influenza A (H1N1) ही पाया गया है। वायरस में किसी नए आनुवंशिक बदलाव या नए म्यूटेशन की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
ज्यादातर मामले हल्के, लेकिन गंभीर लक्षणों को न करें नजरअंदाज
भारतीय चिकित्सा संघ के अनुसार H1N1 के ज्यादातर संक्रमण हल्के होते हैं और समय गुजरने के साथ ठीक हो जाते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, सूखी खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, सिरदर्द, नाक बहना या बंद होना और अत्यधिक थकान आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। बच्चों में मतली, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक न लें
IMA ने स्पष्ट किया है कि H1N1 एक वायरल संक्रमण है और एंटीबायोटिक वायरस को खत्म नहीं करते। फ्लू के लक्षणों में खुद से एजिथ्रोमाइसिन, एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलैनेट, सेफिक्सिम या दूसरी एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बचना चाहिए। अनावश्यक एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से शरीर के लाभकारी माइक्रोबायोम पर असर पड़ सकता है और Antimicrobial Resistance (AMR) का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए एंटीबायोटिक दवा केवल डॉक्टर की सलाह और बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि के बाद ही जरूरी होने पर लेना चाहिए।
Oseltamivir भी डॉक्टर की सलाह पर ही लें
IMA ने Oseltamivir जैसी एंटीवायरल दवाओं को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है। यह प्रिस्क्रिप्शन दवा है और इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह एवं निगरानी में ही किया जाना चाहिए। लोगों को किसी भी एंटीवायरल दवा का खुद से कभी भी सेवन नहीं करने की सलाह दी गई है।
इन गंभीर लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाएं
अगर मरीज को सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना, तेजी से सांस लेना, सीने में दर्द या लगातार दबाव, होंठ या उंगलियां नीली पड़ना, खून वाली खांसी, भ्रम, अत्यधिक उनींदापन, दौरे या लगातार उल्टी जैसी समस्या हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बच्चों में दूध या खाना पीने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती, सांस लेते समय असामान्य आवाज या सीने का अंदर की ओर धंसना भी गंभीर चेतावनी के संकेत माने जाते हैं।
संक्रमण से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
IMA ने लोगों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोने या अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। खांसते और छींकते समय मुंह-नाक को टिश्यू या मुड़ी हुई कोहनी से ढकें। भीड़भाड़ और बंद जगहों पर अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क संक्रमण का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है। बीमार होने पर घर पर रहें। बुखार कम करने वाली दवा के बिना बुखार पूरी तरह ठीक होने के बाद कम से कम 24 घंटे तक स्कूल, ऑफिस और सामाजिक आयोजनों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
किन लोगों को फ्लू वैक्सीन पर ध्यान देना चाहिए ?
IMA ने स्वास्थ्यकर्मियों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर या पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को वार्षिक मौसमी फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। IMA का कहना है कि मौसमी H1N1 मामलों में बढ़ोतरी के बीच सावधानी जरूरी है, लेकिन फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। लोगों को लक्षणों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की सलाह दी गई है।




