नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026। अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस दौरान लोकसभा सीटें बढ़ाने के लिए संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल को पास कराया जाएगा। इसके बाद महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। छह महीने (16 और 17 अप्रैल) पहले सरकार पहले प्रयास में कामयाब नहीं रही थी और लोकसभा में दो तिहाई बहुमत जुटा नहीं पाई थी। अब कहा जा रहा है कि सरकार ने संख्याबल जुटा लिया है। विशेष सत्र बुलाने से करीब एक हफ्ते पहले इसकी सूचना दी जा सकती है। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म हुआ था, लेकिन इसका अब तक सत्रावसान नहीं किया गया है। हालांकि विशेष सत्र की तारीख और विधेयकों को पेश करने को लेकर अभी घोषणा नहीं हुई है।

लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की चुनौती

संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। सामान्य तौर पर इसका मतलब सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत के साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन से है। खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में NDA के पास पर्याप्त समर्थन जुटाने की चुनौती है। वहीं, राज्यसभा में भी सरकार को कुछ अन्य दलों का समर्थन हासिल करना पड़ सकता है। ऐसे में विधेयकों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार कितने सांसदों का समर्थन जुटा पाती है।

DMK और छोटे दलों से समर्थन जुटाने की चर्चा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार DMK और कुछ छोटे दलों से समर्थन हासिल करने के लिए बातचीत कर सकती है। हालांकि, किसी दल के समर्थन या गठबंधन से अलग होने संबंधी दावों की पुष्टि संबंधित दलों के आधिकारिक बयानों से की जानी चाहिए। संविधान संशोधन से जुड़े विधेयकों के लिए सदन में जरूरी संख्या जुटाना सरकार के सामने अहम राजनीतिक चुनौती हो सकती है।

महिला आरक्षण और परिसीमन का क्या है संबंध ?

महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। इसके लागू होने की प्रक्रिया परिसीमन और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ी है। परिसीमन का अर्थ जनसंख्या और कानून में निर्धारित मानदंडों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया है। लोकसभा की सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव भी इसी व्यापक बहस से जुड़ा है।

अप्रैल में विशेष सत्र में क्या हुआ था ?

प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 15 से 17 अप्रैल 2026 के बीच महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर विचार के लिए विशेष सत्र बुलाया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संबंधित विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई समर्थन नहीं मिल पाया था। बताए गए मतदान आंकड़ों के अनुसार, 528 सांसदों ने मतदान किया था। इनमें 298 वोट पक्ष में और 230 विपक्ष में पड़े। यदि ये आंकड़े संबंधित विधेयक के आधिकारिक मतदान रिकॉर्ड से मेल खाते हैं, तो आवश्यक दो-तिहाई समर्थन हासिल नहीं होने के कारण विधेयक पारित नहीं हुआ था।

मानसून सत्र के बाद विशेष सत्र की संभावना

रिपोर्ट में कहा गया है कि संसद के मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त को हुई थी और उसके बाद सत्रावसान की औपचारिक घोषणा नहीं की गई। इस स्थिति का विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया से क्या संबंध है, इसकी पुष्टि संसद के आधिकारिक बुलेटिन और राष्ट्रपति की अधिसूचना से की जानी चाहिए।फिलहाल, सबसे अहम सवाल यही है कि क्या केंद्र सरकार इसी महीने विशेष सत्र बुलाने की औपचारिक घोषणा करती है और क्या महिला आरक्षण, परिसीमन तथा लोकसभा की सीटें बढ़ाने से जुड़े विधेयक संसद में फिर पेश किए जाते हैं।