नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 और 12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ भारत और कनाडा व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। दोनों देश आपसी व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा अपने व्यापारिक संबंधों को विविध बनाने और नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
भारत-कनाडा ट्रेड डील पर होगी बातचीत
भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बातचीत दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए अहम मानी जा रही है। इस तरह के समझौते का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और कारोबार के लिए स्पष्ट नियम तय करना होता है। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास पहुंचाना बताया गया है। व्यापार समझौते की प्रगति से ऊर्जा, तकनीक, कृषि, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं।
मोदी और मार्क कार्नी के बीच फोन पर बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच 13 अक्टूबर को फोन पर बातचीत होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों देश व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में शामिल बताए गए हैं।
ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजारों की तलाश में
अमेरिका कनाडा के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। अमेरिकी टैरिफ नीतियों और व्यापार को लेकर अनिश्चितता के बीच कनाडा अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहा है। भारत दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। बड़ी आबादी, बढ़ता उपभोक्ता बाजार और ऊर्जा व तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भारत को कनाडा के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनाती हैं। हालांकि, भारत-कनाडा व्यापार समझौते की प्रगति को केवल अमेरिकी टैरिफ दबाव से जोड़ना सही नहीं होगा। दोनों देशों के अपने आर्थिक और रणनीतिक हित भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
निज्जर हत्याकांड के बाद बिगड़े थे भारत-कनाडा संबंध
भारत और कनाडा के संबंधों में सितंबर 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित भूमिका के आरोप लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को खारिज किया था। 2024 में दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव और बढ़ गया। कनाडा ने भारतीय राजनयिकों पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि भारत ने आरोपों का विरोध किया। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को वापस भेजने के कदम भी उठाए। मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से संबंधों को सामान्य बनाने और व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। प्रस्तावित दिसंबर दौरे को इसी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जा रहा है।
11 साल बाद मोदी का द्विपक्षीय कनाडा दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल 2015 में कनाडा के द्विपक्षीय दौरे पर गए थे। उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर थे। जून 2025 में मोदी कनाडा में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे और इस दौरान मार्क कार्नी से उनकी मुलाकात भी हुई थी। दिसंबर में प्रस्तावित दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक और राजनयिक संबंधों को नई दिशा देने का अवसर हो सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि व्यापार समझौते पर बातचीत कितनी आगे बढ़ती है और क्या दोनों देश किसी औपचारिक समझौते तक पहुंच पाते हैं।




