तिरुवनंतपुरम, 24 अक्टूबर 2026 : केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पद संभालने के बाद लोकभवन में मांसाहारी खाना बनाने और परोसने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस बीच कांग्रेस और विपक्षी CPI(M) ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस ने कहा है कि क्या अब राज्यपाल तय करेंगे कि क्या खाना है। सूत्रों ने कहा कि राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर शाकाहारी हैं। इसी वजह से उन्होंने यह बदलाव कराया है। सूत्रों ने साफ किया कि लोकभवन के कर्मचारियों के खाने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार सुबह केरलम के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सौमेन सेन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई थी। इस तरह नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पदभार संभालने के साथ ही लोकभवन की रसोई में शाकाहारी भोजन बनाने के निर्देश को लेकर विवाद शुरू हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्यपाल ने लोकभवन की रसोई में मांस और मछली पकाने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इस आदेश की खबर सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सत्ताधारी व विरोधी दलों ने ऐतराज जताया है।

कांग्रेस ने फैसले पर उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव और अलप्पुझा से सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस निर्देश की आलोचना की। उनका कहना है कि केरलम की खान-पान की संस्कृति विविधतापूर्ण है और लोगों को अपनी पसंद के अनुसार शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। वेणुगोपाल ने राज्यपाल के कदम को जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की निजी खान-पान की पसंद दूसरों पर नहीं थोपी जानी चाहिए। केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भोजन की पसंद को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया। CPI(M) के प्रदेश सचिव एमवी गोविंदन ने इस निर्देश पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी पसंद का भोजन चुनने का अधिकार है और व्यक्तिगत पसंद को दूसरों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। ये नेताओं के राजनीतिक बयान हैं।

लोकभवन ने क्या सफाई दी ?

सूत्रों के मुताबिक ओम प्रकाश माथुर शाकाहारी हैं और उनके भोजन के लिए इस्तेमाल होने वाली रसोई में केवल शाकाहारी खाना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस रसोई में बना भोजन राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को दिया जाता है।लोकभवन के कर्मचारियों को अपनी पसंद का भोजन घर से लाने या बाहर खाने से नहीं रोका गया है। जानकारी के मुताबिक यह निर्देश सभी कर्मचारियों के खान-पान पर लागू होने वाला सामान्य प्रतिबंध नहीं है। हालांकि लोकभवन में आयोजित कार्यक्रमों और मेहमानों को परोसे जाने वाले भोजन पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठे हैं।

भोजन की पसंद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बहस

इस विवाद ने सरकारी आवास में भोजन की व्यवस्था और व्यक्तिगत खान-पान की पसंद को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ राज्यपाल के समर्थक इसे उनकी निजी भोजन संबंधी पसंद से जोड़कर देख सकते हैं, वहीं आलोचकों का सवाल है कि सरकारी परिसर की साझा व्यवस्थाओं में इस तरह के निर्देशों की सीमा क्या होनी चाहिए। फिलहाल, इस मामले में सबसे अहम अंतर यह है कि राज्यपाल की रसोई में शाकाहारी भोजन बनाने का निर्देश और लोकभवन के सभी कर्मचारियों पर मांसाहार प्रतिबंधित करने के दावे एक ही बात नहीं हैं। रिपोर्टों के अनुसार कर्मचारियों के निजी खान-पान पर रोक नहीं लगाई गई है।