न्यूयॉर्क, 24 अक्टूबर 2026 : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारत ने परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण इस्तेमाल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के तकनीकी सहयोग कार्यक्रमों और विकासशील देशों की संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने में उसकी भूमिका का समर्थन किया। इस बीच भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के कार्यक्रम में कई देशों ने भारत की विकास सहायता के लिए आभार जताया है।
परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर भारत का जोर
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की नेता और सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और सदस्य देशों की क्षमताओं को मजबूत करने में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की भूमिका को रेखांकित किया। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन के मुताबिक, भारत ने IAEA के तकनीकी सहयोग कार्यक्रम और उसकी प्रमुख पहलों के प्रति अपना समर्थन दोहराया। इस सहयोग का उद्देश्य परमाणु विज्ञान के लाभ जरूरतमंद देशों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और नियामक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। भारत ने विकासशील देशों के बीच सहयोग यानी साउथ-साउथ कोऑपरेशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई। इस अवधारणा के तहत विकासशील देश आपसी सहयोग से तकनीकी ज्ञान, अनुभव और विकास के अवसर साझा करते हैं।
भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास कोष की भी हुई सराहना
22 अक्टूबर को आयोजित भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के नौवें वार्षिक कार्यक्रम में कई देशों ने भारत की विकास सहायता की प्रशंसा की। लाओस, श्रीलंका, तंजानिया, माइक्रोनेशिया, मोल्दोवा, मोरक्को और सेंट लूसिया के प्रतिनिधियों ने विभिन्न विकास परियोजनाओं में भारत के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। संयुक्त राष्ट्र में मोल्दोवा के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत जॉर्जे ल्यूका ने कहा कि इस साझेदारी से उनके देश में जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल सार्वजनिक नीतियों को बेहतर बनाने के लिए करने की क्षमता मजबूत हुई है। उन्होंने आधिकारिक विकास सहायता पर बढ़ते दबाव के बीच भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया। ल्यूका के मुताबिक, आपसी सम्मान, एकजुटता और देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर आधारित साझेदारी से ठोस नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।
श्रीलंका और तंजानिया ने भी की भारत की तारीफ
संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के प्रतिनिधि जयनथा जयसूर्या ने कहा कि भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष अलग-अलग क्षेत्रों में परियोजनाओं को सहयोग देता है। इन परियोजनाओं का चयन संबंधित देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर किया जाता है। लाओस के संयुक्त राष्ट्र राजदूत थोंगफेन सवनफेट ने विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में भारत की भूमिका की सराहना की। वहीं, तंजानिया के प्रतिनिधि टोगोलानी एड्रिस मावुरा ने अपने देश में सतत विकास के लिए भारत के निरंतर समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।
वैश्विक विकास में भारत की साझेदारी पर फोकस
UNGA में भारत का संदेश परमाणु विज्ञान के शांतिपूर्ण उपयोग, तकनीकी सहयोग और विकासशील देशों की क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित रहा। वहीं, भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के कार्यक्रम में दूसरे देशों की ओर से मिली सराहना ने विकास सहयोग के क्षेत्र में भारत की भूमिका को रेखांकित किया। हालांकि जानकारी में भारत की ओर से दूसरे देशों को किसी विशिष्ट परमाणु तकनीक के हस्तांतरण की घोषणा का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस घटनाक्रम को परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग के समर्थन के रूप में समझना सही होगा।




