नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026 : विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23-24 अगस्त को रूस के दौरे पर रहेंगे। रूस की राजधानी मॉस्को में होने वाली यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ वैश्विक राजनीति में भी तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित भारत यात्रा से पहले जयशंकर का यह दौरा कई रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, भुगतान व्यवस्था और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने वाले कई मुद्दे बैठक के एजेंडे में रहेंगे।
भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में शामिल होंगे जयशंकर
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जयशंकर रूस के प्रथम उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के निमंत्रण पर मॉस्को जा रहे हैं। वहां वह भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता करेंगे। FM बैठक में व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की जाएगी। जयशंकर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात करेंगे।
पुतिन की भारत यात्रा का एजेंडा हो सकता है अहम मुद्दा
जयशंकर के रूस दौरे का एक प्रमुख फोकस पुतिन की संभावित भारत यात्रा की तैयारियां भी हो सकता है। दोनों देशों के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत में सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। इसके साथ ही BRICS के विस्तार और ग्लोबल साउथ में भारत-रूस सहयोग को मजबूत करने पर भी बातचीत हो सकती है।
नॉर्दर्न सी रूट पर बढ़ सकती है भारत की भागीदारी
भारत और रूस के बीच Northern Sea Route (NSR) को लेकर सहयोग भी इस दौरे का महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है। आर्कटिक क्षेत्र से होकर गुजरने वाला यह समुद्री मार्ग एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा सकता है। भारत के लिए NSR खास तौर पर ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण हो सकता है। रूस इस मार्ग में भारत की भागीदारी बढ़ाने में रुचि दिखा चुका है। इसके साथ ही चेन्नई-व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर को NSR से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो सकती है। इससे भारत-रूस के बीच समुद्री संपर्क और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रुपया-रूबल कारोबार और ट्रेड बैलेंस पर फोकस
भारत और रूस के बीच व्यापार में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन एक चुनौती बना हुआ है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा और अन्य उत्पाद आयात करता है, जबकि रूस को भारत का निर्यात अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में दोनों देश रुपया-रूबल भुगतान व्यवस्था, भारतीय उत्पादों के रूसी बाजार में विस्तार और व्यापार असंतुलन कम करने के विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं। कृषि, फार्मा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाने पर भी जोर हो सकता है।
रक्षा सहयोग और स्पेयर पार्ट्स भी अहम मुद्दा
भारत की रक्षा व्यवस्था में रूसी मूल के कई हथियार और सैन्य प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में रक्षा उपकरणों की सप्लाई, रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भारत के लिए अहम मुद्दा है। जयशंकर की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लगातार बनाए रखने और सैन्य उपकरणों की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर बातचीत हो सकती है।
चीन के बीच संतुलन साधने की कोशिश
रूस और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंध भारत के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की चीन पर आर्थिक और रणनीतिक निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि मॉस्को के साथ अपने पारंपरिक और रणनीतिक रिश्तों को मजबूत बनाए रखे। जयशंकर का दौरा इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भारत रूस के साथ अपने रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक संबंधों को मजबूत करते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को आगे बढ़ाना चाहता है। कुल मिलाकर, जयशंकर की मॉस्को यात्रा को केवल एक नियमित कूटनीतिक दौरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पुतिन की संभावित भारत यात्रा, व्यापार संतुलन, NSR, रक्षा आपूर्ति और रुपया-रूबल कारोबार जैसे मुद्दे इस यात्रा को खास बनाते हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर अंतिम समझौते या फैसले बैठक के बाद ही स्पष्ट होंगे।




