पटना, 29 अगस्त 2026 : क्या सम्राट सरकार आर्थिक संकट में है या फिर यूं ही सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि बिहार में नई सरकार बनने के बाद से कई योजनाओं और सरकारी भुगतान को लेकर देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं वेतन और पेंशन की राशि किश्तों में जारी होने की बात है, तो कहीं संविदा कर्मियों के मानदेय और इंक्रीमेंट को लेकर कर्मचारी संगठन सवाल उठा रहे हैं। जीविका दीदियों की दूसरी किस्त का भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से ही किया जा रहा है। इसी बीच Student Credit Card Scheme में राशि को लेकर सरकार के फैसले और फिर उसमें बदलाव ने भी चर्चा बढ़ा दी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार सरकार खर्चों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है या राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है ? आपको हम बताते हैं इसके कारण और संकेत, जिनके आधार पर बिहार सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर बार-बार सवाल उठ रहे हैं।
बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए राशि जारी करने की रफ्तार धीमी
पथ निर्माण विभाग के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए राशि जारी करने की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध बजट आवंटन के मुताबिक मई व जून 2026 में अलग-अलग प्लान हेड के तहत राशि जारी की गई। एक जून को प्लान हेड 103 के तहत 55 करोड़ रुपए और दो जून को प्लान हेड 101 के तहत 150 करोड़ और प्लान हेड 102 के तहत 84 करोड़ जारी किए गए। वहीं, 27 मई को प्लान हेड 124 के तहत UIDF-NHB के लिए 60 करोड़ रुपए जारी किए गए थे। इन आंकड़ों के आधार पर यह चर्चा है कि बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए फंड रिलीज की प्रक्रिया पहले की तुलना में धीमी हुई है।
डेटा एंट्री ऑपरेटरों के 10% इंक्रीमेंट पर रोक
बिहार में संविदा पर काम कर रहे डेटा एंट्री ऑपरेटरों के वार्षिक इंक्रीमेंट को लेकर भी विवाद है। कर्मचारी संगठन का दावा है कि इस साल मिलने वाला 10% इंक्रीमेंट नहीं दिया गया। बिहार राज्य डेटा एंट्री ऑपरेटर संघ ने वित्त विभाग और उपमुख्यमंत्री बीजेंद्र यादव से इंक्रीमेंट लागू करने की मांग की है। संघ के मुताबिक, मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर पंचायत स्तर तक 20 हजार से अधिक डेटा एंट्री ऑपरेटर काम कर रहे हैं।
जीविका दीदियों को दूसरी किस्त का इंतजार
JEEViKA से जुड़ी महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता भी चरणबद्ध तरीके से दी जा रही है। सरकार की ओर से 27 अगस्त को 600 करोड़ रुपए जारी किए गए। इसके तहत करीब एक लाख जीविका दीदियों को 20-20 हजार रुपए की दूसरी किस्त दिए जाने की बात कही गई है। इससे पहले पहली किस्त के तौर पर 10-10 हजार रुपए दिए गए थे। दूसरी किस्त के भुगतान में लंबा अंतराल होने के कारण लाभार्थियों के बीच इंतजार की स्थिति बनी रही।
बेरोजगारी भत्ते के भुगतान में देरी की शिकायत
मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत पात्र बेरोजगार युवाओं को अधिकतम 24 महीने तक हर महीने 1,000 रुपए की सहायता देने का प्रावधान है। हालांकि, कुछ लाभार्थियों की ओर से भुगतान में देरी की शिकायतें सामने आई हैं।
KYP केंद्रों के संचालन को लेकर सवाल
बिहार में युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने के लिए Kushal Yuva Program (KYP) चलाया जाता है। इन केंद्रों पर कंप्यूटर, कम्युनिकेशन और अन्य कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। नए वित्तीय वर्ष में KYP केंद्र संचालकों को भुगतान में देरी की शिकायत सामने आई। इसी मुद्दे को लेकर 20 अगस्त को KYP संचालक भाजपा प्रदेश कार्यालय तक पहुंचे और अपनी मांगें रखीं।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान चरणबद्ध
राज्य में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान को लेकर किश्तों और बकाया राशि का मुद्दा सामने आया है। सरकार की ओर से बकाया राशि का भुगतान किए जाने की बात कही गई है। पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों, विधवाओं व अन्य लाभार्थियों के लिए भुगतान में देरी उनके खर्चों को प्रभावित कर सकती है।
संविदा कर्मियों के मानदेय में देरी
कृषि, जल संसाधन, गृह विभाग और दूसरे विभागों में संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों के मानदेय में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं। एक कृषि समन्वयक के मुताबिक, उन्हें कई महीनों तक मानदेय नहीं मिला। उनका कहना है कि भुगतान मिलने के बाद पुराने उधार चुकाने पड़ते हैं और फिर अगले भुगतान तक आर्थिक दबाव बना रहता है। हालांकि, ऐसी शिकायतें सभी विभागों या सभी संविदा कर्मियों की स्थिति को समान रूप से नहीं दर्शातीं।
वेतन-पेंशन की राशि किश्तों में जारी
वित्त विभाग की ओर से बजट 2026-27 में वेतन मद की राशि को चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाने की बात सामने आई है। इसी वजह से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के भुगतान को लेकर चर्चा तेज हुई है। सवाल यह है कि क्या यह सामान्य बजटीय प्रक्रिया है या सरकार नकदी प्रबंधन के दबाव में भुगतान की गति नियंत्रित कर रही है।
विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों का बकाया भुगतान
बिहार के विश्वविद्यालयों में टीचिंग और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान को लेकर भी लंबे समय से समस्या रही है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से मार्च से मई 2026 तक के बकाया वेतन और पेंशन के लिए जून में राशि जारी की गई थी। इसके बाद जून से अगस्त के चालू और बकाया भुगतान के लिए अगस्त में करीब 1,127.34 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई। इससे संकेत मिलता है कि सरकार विश्वविद्यालयों के पुराने भुगतान को चरणबद्ध तरीके से निपटाने की कोशिश कर रही है।
विधायक मद और कर्मचारियों के एरियर पर भी इंतजार
विधायक मद की योजनाओं में राशि जारी होने का इंतजार होने की शिकायतें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कई मामलों में फंड रिलीज होने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ाने को कहा जा रहा है। इसी तरह सरकारी कर्मचारियों के एरियर भुगतान को चरणबद्ध तरीके से किए जाने की बात कही जा रही है।
Student Credit Card पर फैसला बदला, फिर सरकार ने दी सफाई
19 अगस्त 2026 को बिहार सरकार की Student Credit Card Scheme को लेकर एक अहम फैसला सामने आया। उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को सीधे 2 लाख रुपए देने की व्यवस्था की बात कही गई थी। फैसले पर चर्चा बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पांच दिन बाद स्पष्ट किया कि छात्रों को पहले की तरह चार लाख रुपए तक का कर्ज मिलेगा। इस घटनाक्रम ने सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और योजनाओं के खर्च को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
क्या बिहार सरकार आर्थिक संकट में है ?
वेतन-पेंशन का चरणबद्ध भुगतान, संविदा कर्मियों के भुगतान और इंक्रीमेंट से जुड़ी शिकायतें, बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंड रिलीज की गति, जीविका दीदियों की किस्त और दूसरी योजनाओं में भुगतान में देरी—इन सभी को एक साथ देखकर सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं, मगर केवल इन संकेतों पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि राज्य सरकार आर्थिक संकट में है। सरकारी भुगतान कई बार बजट आवंटन, विभागीय मंजूरी, नकदी प्रबंधन और वित्तीय वर्ष की प्रक्रियाओं के कारण भी चरणबद्ध तरीके से किए जाते हैं। मगर अब आने वाले महीनों में बजट खर्च, राजस्व संग्रह, योजनाओं के लिए फंड रिलीज और लंबित भुगतान की स्थिति से तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है।




