नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और CPI (M) नेता पिनाराई विजयन से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए हैं। इस बीच शीर्ष अदालत ने पूछा है कि आखिर ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि संबंधित पक्षों को सुने बिना आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सीएम विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और अन्य याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने का मौका दे दिया। अदालत ने संबंधित FIR से जुड़ी जांच पर एक सप्ताह के लिए अंतरिम रोक लगाई है। हालांकि, FIR को रद्द नहीं किया गया है और न ही आरोपों पर अंतिम फैसला सुनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर क्या कहा ?
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने उनका पक्ष सुने बिना FIR दर्ज करने और आगे की कार्रवाई का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस वी. मोहना ने सवाल उठाया कि ऐसी कौन-सी असाधारण जल्दबाजी थी, जिसके कारण संबंधित पक्षों को सुने बिना आदेश पारित करना जरूरी समझा गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को कानूनी मुद्दों पर अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि अंतरिम राहत को मामले के गुण-दोष पर उसकी अंतिम राय नहीं माना जाए।
FIR बरकरार, जांच पर एक सप्ताह की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह FIR पर रोक नहीं लगा रहा है। फिलहाल केवल उससे जुड़ी जांच को एक सप्ताह के लिए रोकने का निर्देश दिया गया है, ताकि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में अपील कर सकें।कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति का पद कितना बड़ा क्यों न हो, वह कानून से ऊपर नहीं है। साथ ही जांच एजेंसियों को अपनी कानूनी शक्तियों और अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर काम करना चाहिए।
क्या है CMRL-एक्सलॉजिक मामला ?
यह मामला केरल की सरकारी कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और आईटी कंपनी एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए कथित भुगतान से जुड़ा है। एक्सलॉजिक को विजयन की बेटी वीणा टी. से संबंधित कंपनी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2020 के बीच कंपनी को 2.78 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि भुगतान के बदले पर्याप्त सेवाएं नहीं दी गईं। ये आरोप हैं, जिनकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए पुष्टि होनी बाकी है। ED की ओर से भेजी गई जानकारी के आधार पर केरल में FIR दर्ज किए जाने और हाईकोर्ट के निर्देश को लेकर भी कानूनी विवाद खड़ा हुआ। विजयन के पक्ष ने आदेश को चुनौती देते हुए प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर सवाल उठाए।
ED और राज्य की जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र और कानूनी प्रक्रिया का उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि ED अपना कानूनी काम कर सकती है, लेकिन उसे दूसरी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अदालत के सामने यह सवाल भी आया कि ED से मिली जानकारी के आधार पर राज्य पुलिस को किस सीमा तक कार्रवाई करनी चाहिए और जांच शुरू करने से पहले किन कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन जरूरी है। इन मुद्दों पर आगे हाईकोर्ट में सुनवाई और कानूनी समीक्षा होनी है। सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम राहत को मामले के अंतिम नतीजे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं
CPI (M) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने फैसले को कानून के शासन से जुड़ा बताया और मामले को राजनीतिक तथा कानूनी स्तर पर लड़ने की बात कही। वहीं BJP के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि राहत केवल एक सप्ताह के लिए जांच रोकने तक सीमित है, ताकि पूर्व सीएम विजयन हाईकोर्ट में अपील कर सकें। फिलहाल मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक से जांच अस्थायी रूप से रुकी है, लेकिन FIR और उससे जुड़े आरोप कायम हैं। मगर अब आगे की स्थिति हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और अदालतों के आदेशों पर निर्भर करेगी।




