नई दिल्ली/ढाका | 04 अगस्त 2026

भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल पुरानी गंगा जल संधि इस वर्ष दिसंबर में समाप्त होने जा रही है। ऐसे में जल बंटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश ने संधि के भविष्य पर बातचीत शुरू करने के लिए भारत से अनुरोध किया है। हालांकि भारत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश ने जून 2026 में नई दिल्ली को वार्ता का प्रस्ताव भेजा था। वहीं भारतीय पक्ष का कहना है कि इस विषय पर चर्चा दोनों देशों के संयुक्त नदी आयोग (Joint Rivers Commission) के स्थापित तंत्र के तहत और आपसी सहमति से तय समय पर की जाएगी।

क्या है गंगा जल संधि ?

भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और तत्कालीन बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 वर्षों के लिए एक समझौता हुआ था। यह संधि मुख्य रूप से फरक्का बैराज से जनवरी से मई के बीच छोड़े जाने वाले पानी के बंटवारे का ढांचा तय करती है।

कैसे होता है पानी का बंटवारा ?

संधि के अनुसार : यदि फरक्का बैराज पर जल प्रवाह 70,000 क्यूसेक से कम हो, तो दोनों देशों को लगभग बराबर हिस्सा मिलता है।

यदि जल प्रवाह 75,000 क्यूसेक से अधिक हो, तो भारत को लगभग 40,000 क्यूसेक पानी मिलता है और शेष बांग्लादेश को दिया जाता है।

11 मार्च से 10 मई के बीच दोनों देशों को बारी-बारी से निर्धारित अवधि के लिए 35,000 क्यूसेक पानी मिलने की व्यवस्था है।

बांग्लादेश ने बनाई विशेषज्ञ समिति

रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश सरकार ने गंगा जल संधि की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए एक आंतरिक विशेषज्ञ समिति गठित की है। समिति का उद्देश्य सीमा-पार नदियों के जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर नई रणनीति तैयार करना है।

भारत का क्या है रुख ?

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, गंगा जल संधि सहित साझा नदियों से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत संयुक्त नदी आयोग के माध्यम से की जाएगी। विदेश मंत्रालय पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि भारत और बांग्लादेश के बीच 54 साझा नदियां हैं और जल संबंधी सभी विषय स्थापित द्विपक्षीय तंत्र के तहत सुलझाए जाते हैं।

क्यों अहम है यह संधि ?

गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों की महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है। दिसंबर 2026 में इसकी अवधि समाप्त होने से पहले दोनों देशों के बीच नई वार्ता और संभावित संशोधन पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, दोनों देशों की ओर से संधि के नवीनीकरण या नए समझौते को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।