नई दिल्ली | 4 अगस्त 2026
केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 से अब तक भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में बड़ी सफलता का दावा किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया है। इनमें आतंकवाद, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या, दुष्कर्म और साइबर अपराध जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं।
ऑपरेशन त्रिशूल और BHARTPOL से मिली रफ्तार
सरकार के अनुसार, गृह मंत्रालय की अगुवाई में शुरू किए गए 'ऑपरेशन त्रिशूल' के तहत आधुनिक तकनीक, डिजिटल फुटप्रिंट, सैटेलाइट डेटा और प्रोफाइल मैपिंग के जरिए विदेशों में छिपे अपराधियों का पता लगाया गया। इसके अलावा, CBI के ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर और जनवरी 2025 में शुरू किए गए BHARTPOL पोर्टल ने केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया को तेज किया, जिससे कार्रवाई में लगने वाला समय घटकर 3 से 10 दिन रह गया।
संपत्ति जब्त करने में भी बड़ी कार्रवाई
सरकार के मुताबिक, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के सख्त क्रियान्वयन के तहत 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा ₹18,762 करोड़ से अधिक की राशि की सफल रिकवरी भी की गई है।
नए कानूनों से मिली कानूनी मजबूती
सरकार का कहना है कि नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत 'ट्रायल इन एब्सेंटिया' (आरोपी की गैरमौजूदगी में मुकदमा) का प्रावधान लागू किया गया है। इससे विदेश में छिपे आरोपियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
किन मामलों के आरोपी सबसे ज्यादा लौटाए गए ?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019 से जुलाई 2026 तक प्रत्यर्पित 274 भगोड़ों में प्रमुख श्रेणियां इस प्रकार हैं—
हत्या, डकैती एवं हिंसक अपराध – 62
यौन अपराध एवं POCSO – 53
संगठित अपराध एवं गैंगस्टर – 42
अन्य अपराध – 45
मानव तस्करी एवं अपहरण – 18
आतंकवाद एवं राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां – 17
मादक पदार्थ तस्करी – 16
साइबर अपराध, जाली मुद्रा एवं तस्करी – 12
वित्तीय एवं धोखाधड़ी के मामले – 9
एजेंसियों के संयुक्त प्रयास का दावा
सरकार ने इस अभियान की सफलता का श्रेय IB, CBI, R&AW, NIA, ED, विदेश मंत्रालय (MEA) और अन्य एजेंसियों के समन्वित प्रयासों को दिया है। साथ ही इंटरपोल के सहयोग से जारी रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या भी लगातार बढ़ाई गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 में जहां 40 रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए थे, वहीं 2026 में अब तक यह संख्या 182 पहुंच चुकी है।




