मुंबई, 26 अगस्त 2026 : महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर मुंबई महानगर क्षेत्र में चर्च और पादरियों के बीच हलचल बढ़ गई है। इस बीच एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ चर्चों में गैर-ईसाई लोगों से सहमति पत्र (Consent Letter) लिए जा रहे हैं। पादरियों का कहना है कि इन दस्तावेजों के जरिए यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि लोग किसी दबाव या प्रलोभन के कारण नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से प्रार्थना सभा में शामिल हुए थे।

दो-तीन महीने से चल रही सहमति पत्र लेने की प्रक्रिया

मुंबई से सटे पालघर जिले के वसई क्षेत्र के पादरी सैम मथाई के अनुसार चर्च आने वाले लोगों से सहमति पत्र लेने की प्रक्रिया पिछले दो-तीन महीनों से लगातार जारी है। इन पत्रों को चर्च के कार्यालय में सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों या प्रशासन के सामने आसानी से प्रस्तुत किया जा सके। इशके साथ ही लोगों के बीच सही संदेश भी जाए।


चर्चों पर हमलों का भी दावा

पादरी सैम मथाई ने दावा किया कि पिछले छह महीनों में मुंबई महानगर क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में चर्चों पर हमले या विवाद की करीब 11 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें वसई-विरार, नालासोपारा, पालघर और भाईंदर जैसे इलाके मुख्य रूप से शामिल बताए गए हैं। उनका आरोप है कि कुछ दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोग बिना पूर्व सूचना के चर्चों में पहुंच जाते हैं और वहां मौजूद लोगों के साथ कथित तौर पर अभद्रता या फिर मारपीट भी करते हैं। इसी के चलते चर्च समुदाय ने अपने स्तर पर सावधानी बढ़ाने और सहमति पत्र रखने का फैसला किया है।

मुंबई महानगर क्षेत्र में हजारों चर्च

रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र में करीब 4,000 से अधिक चर्च हैं। इनमें से कई चर्चों में जन्म से गैर-ईसाई लोगों के प्रार्थना सभाओं में शामिल होने पर उनकी स्वैच्छिक सहमति का रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि धर्मांतरण से जुड़े आरोपों और सहमति पत्रों की कानूनी स्थिति को लेकर अंतिम तस्वीर संबंधित कानून और प्रशासनिक जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगी। किसी व्यक्ति का प्रार्थना सभा में शामिल होना अपने आप में धर्मांतरण का प्रमाण नहीं माना जा सकता।