नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026 : पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से कथित आतंकी बने शहजाद भट्टी का नाम भारत में हुई कई हिंसक घटनाओं की जांच में सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसके नेटवर्क ने सोशल मीडिया के जरिए भारत में युवाओं से संपर्क करने और उन्हें अलग-अलग गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की भरपूर कोशिश की। हालांकि, भारत सरकार की ओर से उसके नेटवर्क को लेकर कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने सीमा पार बैठे कथित हैंडलर्स और उनके नेटवर्क तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती है।
जालंधर हमले के बाद सामने आया नाम
16 मार्च 2025 को पंजाब के जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर नवदीप सिंह संधू के घर पर ग्रेनेड फेंके जाने की घटना हुई थी। जांच के दौरान स्थानीय युवक हार्दिक कंबोज को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी ने कथित तौर पर हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की जांच में शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क और भारत में सक्रिय स्थानीय युवाओं के बीच संपर्क की जानकारी सामने आने का दावा किया गया।
सोशल मीडिया को बनाया संपर्क का जरिया
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कथित नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में युवाओं तक पहुंचने की कोशिश करता था। पहले सामान्य बातचीत और छोटे कामों के जरिए संपर्क बनाया जाता और इसके बाद उन्हें कथित तौर पर दूसरे कार्यों में शामिल किया जाता था। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल डिवाइस और ऑनलाइन कम्युनिकेशन की जांच से महत्वपूर्ण जानकारी मिलने का दावा है।
नेटवर्क में अलग-अलग जिम्मेदारियां होने का दावा
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती थीं। इनमें सोशल मीडिया के जरिए संपर्क, युवाओं की भर्ती, कथित तौर पर ब्रेनवॉश, हथियारों की व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर गतिविधियों का समन्वय शामिल बताया गया है।सूत्रों के मुताबिक, नेटवर्क का तरीका बड़े हमले की बजाय छोटे-छोटे हमलों के जरिए डर और अस्थिरता पैदा करने पर केंद्रित होने का दावा किया गया है।
युवाओं को कथित तौर पर कई चरणों में जोड़ने का दावा
जांच में सामने आए दावों के मुताबिक, कथित नेटवर्क जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए तलाशता था। शुरुआत में उनसे छोटे काम कराए जाते थे और बाद में उन्हें ज्यादा जिम्मेदारी वाले कार्य सौंपे जाने का आरोप है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों में डिजिटल कम्युनिकेशन, पैसों के लेन-देन और संपर्कों की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
तीन मामलों में एक जैसा पैटर्न मिलने का दावा
शहजाद भट्टी से कथित तौर पर जुड़े जिन मामलों की जांच की जा रही है, उनमें जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के घर हमला, सिरसा महिला थाने पर हमला और अंबाला में कार ब्लास्ट शामिल हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन मामलों में पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर्स, सोशल मीडिया के जरिए संपर्क और स्थानीय स्तर पर युवाओं की भूमिका जैसी समानताएं सामने आई हैं। जून 2026 में NIA ने पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में छापेमारी की थी। जांच के दौरान जब्त डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों और कम्युनिकेशन से जुड़े डेटा की जांच की गई। एजेंसी की जांच में शहजाद भट्टी का नाम कथित तौर पर एक कॉमन कड़ी के रूप में सामने आने की बात कही गई है।
भारत में नेटवर्क पर कार्रवाई का दावा
केंद्र सरकार ने देश के अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई कर कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों को हिरासत में लेने और साजिशों को नाकाम करने की जानकारी दी है। अलग-अलग मामलों में बड़ी संख्या में संदिग्धों और आरोपियों पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलर्स और नेटवर्क के प्रमुख लोगों तक पहुंचना है।
सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर भी जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर भट्टी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट और पहचान बदलकर गतिविधियां जारी रखने की कोशिश की गई। कुछ अकाउंट भारत में दिखाई नहीं देने की बात सामने आई है, जबकि कुछ अन्य प्रोफाइल अलग-अलग नामों से सक्रिय होने का दावा किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इन अकाउंट्स, उनसे जुड़े डिजिटल नेटवर्क व भारत में संपर्कों की जांच कर रही हैं।
जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रहीं
जांच में कई ऐसे नाम भी सामने आने का दावा किया गया है, जिन्हें कथित नेटवर्क में सोशल मीडिया संपर्क, भर्ती, हथियारों की व्यवस्था या गतिविधियों के समन्वय से जोड़ा जा रहा है। इनमें पाकिस्तान और बलूचिस्तान से जुड़े कुछ गैंगस्टरों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों और भूमिकाओं की पुष्टि संबंधित जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों का फोकस सीमा पार बैठे कथित हैंडलर्स, सोशल मीडिया नेटवर्क और भारत में मौजूद स्थानीय संपर्कों के बीच की कड़ियों को सामने लाने पर है।




