नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026 : भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और वीजा पाबंदियों के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जो दोनों देशों के बीच पुराने सामाजिक रिश्तों की कहानी बयां करती है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से करीब 150 महिलाएं शादी के लिए भारत पहुंची हैं। इन महिलाओं की सगाई भारतीय परिवारों में हुई थी और लंबे समय से वीजा मिलने का इंतजार था। मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव और उसके बाद लागू वीजा पाबंदियों के चलते कई शादियां अटक गई थीं। पहले सिंधी परिवार वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते आसानी से भारत आ जाते थे, मगर बदले हालात में यह रास्ता बंद हो गया था।
बॉर्डर बंद हुआ, तो अपनाया नया रास्ता
सिंधी समुदाय से जुड़े नेता राजेश झांबिया के मुताबिक, करीब 150 पाकिस्तानी महिलाओं की शादियां भारत के अलग-अलग शहरों में तय थीं। इनमें नागपुर, रायपुर, जोधपुर और पुणे जैसे शहर शामिल हैं। वीजा पाबंदियों के कारण ये महिलाएं अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत नहीं आ सकीं। इसके बाद परिवारों ने दूसरे देशों के ट्रांजिट रूट का सहारा लिया। दुल्हनें और उनके रिश्तेदार मस्कट, दुबई, श्रीलंका समेत अन्य रास्तों से हवाई यात्रा कर भारत पहुंचे।
मंदिर की पहल से खुला रास्ता
बताया गया कि वीजा सेवा बंद होने के बाद सिंधी समुदाय के प्रतिनिधियों ने रायपुर स्थित शदानी दरबार के संत युधिष्ठिर लाल शदानी से संपर्क किया। इसके बाद भारत में शादी के लिए इंतजार कर रही महिलाओं की सूची तैयार की गई। सूची के आधार पर गृह मंत्रालय से संपर्क कर इन दुल्हनों और उनके परिवारों को भारत आने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने विशेष परिस्थितियों में उन्हें हवाई मार्ग से भारत आने की अनुमति दी।
अभी 300 और दुल्हनों को इंतजार
सिंधी समुदाय के नेता राजेश झांबिया का दावा है कि पाकिस्तान में अभी भी करीब 300 और महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी सगाई भारत में हुई है और वे शादी के लिए भारत आने का इंतजार कर रही हैं। समुदाय की ओर से सरकार से इन लोगों के लिए भी वीजा सुविधा देने की मांग की गई है।
सिंध की शादी की परंपरा कितनी पुरानी ?
सिंध की शादी की परंपराओं पर सिंधु घाटी सभ्यता, फारसी व मध्य एशियाई प्रभावों की छाप देखने को मिलती है। यहां शादी के रीति-रिवाजों में स्थानीय लोक परंपराओं के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी शामिल हैं। हिंदू और मुस्लिम सिंधी समुदायों में विवाह की रस्मों के तौर-तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन पारंपरिक पहनावे, सजावट और कई सांस्कृतिक रिवाज आज भी सिंध की पहचान का हिस्सा हैं।
बंटवारे के बाद भी कायम रहे रिश्ते
1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद सिंध और भारत के बीच राजनीतिक सीमा जरूर खिंच गई, लेकिन कई परिवारों के सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्ते बने रहे। राजस्थान और गुजरात समेत भारत के पश्चिमी हिस्सों से सिंध के ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं। इसी वजह से सीमा पार होने वाली शादियां कई परिवारों के लिए नई बात नहीं रही हैं। हालांकि मौजूदा तनाव और वीजा प्रतिबंधों ने इन रिश्तों को मुश्किल जरूर बनाया है, लेकिन 150 दुल्हनों का भारत पहुंचना दिखाता है कि दशकों पुरानी पारिवारिक और सांस्कृतिक कड़ियां आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।




